डिजिटल अरेस्ट’ ठगी; पुणे में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से 35 लाख की ठगी
पुणे - ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर अपराधियों ने पिंपरी के 74 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से करीब 35 लाख रुपये की ठगी की है। आरोपियों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताकर यह धोखाधड़ी की। इस मामले में संत तुकारामनगर पुलिस थाने में शुक्रवार को शिकायत दर्ज की गई है। सेवानिवृत्ति के बाद वकालत का काम शुरू करने वाले इस वरिष्ठ नागरिक को 22 जनवरी को एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के दौरान उनके नाम से जुड़ा एक बैंक खाता सामने आया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उस खाते को मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा बताया गया। एक व्यापारी को हिरासत में लेने की बात कहकर, सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तारी की धमकी भी दी गई। इसके बाद “जांच के लिए सत्यापन” के नाम पर कुछ रकम ट्रांसफर करने को कहा गया और जांच पूरी होने पर पैसे वापस मिलने का आश्वासन दिया गया। कानूनी कार्रवाई के डर से संबंधित व्यक्ति ने बताए गए खाते में 35 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन पैसे वापस नहीं मिलने और संपर्क टूटने पर उन्हें शक हुआ। परिवार को जानकारी देने के बाद ठगी का खुलासा हुआ और उन्होंने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक,इन दिनों ‘डिजिटल अरेस्ट’ तरीके से साइबर अपराधी खुद को केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को झूठे मामलों में गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पैसे वसूलते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिक इस तरह की धमकी आधारित ठगी का शिकार हो रहे हैं। संबंधित बैंक खातों की जांच कर आरोपियों की तलाश जारी है।
संवादाता - यश सोलंकी
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