एनसीपी के नगरसेवक हर्षवर्धन मानकर ने कोथरुड में ‘कलाकार कट्टा’ के स्थानांतरण का विरोध किया
पुणे : कोथरुड के गुडलक चौक स्थित प्रसिद्ध ‘कलाकार कट्टा’ को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव ने शहर में एक नई राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस छेड़ दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नगरसेवक हर्षवर्धन दीपक मानकर ने इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने इस स्थान को पुणे की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताते हुए चेतावनी दी कि इसे हटाने से कलाकारों और कला प्रेमियों के इस लंबे समय से चले आ रहे केंद्र पर असर पड़ सकता है। मानकर ने गुडलक चौक का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया, जिसमें यातायात की स्थिति और स्थान की सीमाओं का निरीक्षण किया गया। क्षेत्र में बढ़ती भीड़भाड़ को इस प्रस्ताव का कारण बताया जा रहा है। दौरे के दौरान उन्होंने यहां आने वाले कलाकारों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और सांस्कृतिक मंच को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध दोहराया।
कई वर्षों से ‘कलाकार कट्टा’ कवियों, लेखकों, चित्रकारों, संगीतकारों, रंगकर्मियों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक खुला मंच रहा है। मानकर के अनुसार, यह केवल एक जगह नहीं बल्कि पुणे की स्वतंत्र कलात्मक अभिव्यक्ति और जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि इस पहल की मूल अवधारणा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक पूर्व नगरसेवक द्वारा की गई थी। हालांकि, गुडलक चौक में बढ़ती ट्रैफिक समस्या का हवाला देते हुए कुछ बीजेपी नगरसेवकों ने पुणे महानगरपालिका आयुक्त को लिखित आवेदन देकर इसे स्थानांतरित करने की मांग की है।
इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए मानकर ने कहा कि स्थानीय निवासियों और कला समुदाय के सदस्यों से परामर्श किए बिना ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “कलाकार कट्टा पुणे की सांस्कृतिक विरासत है। इस स्तर के किसी भी निर्णय में सभी हितधारकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जरूरी है।” उन्होंने आगे बताया कि वह उपमुख्यमंत्री एवं संरक्षक मंत्री सुनेत्रा अजित पवार, केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल और पीएमसी आयुक्त नवल किशोर राम को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह करेंगे।
यह विवाद अब शहर में एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है कि किस तरह शहरी यातायात प्रबंधन और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए। कलाकारों और नागरिक प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐसे समाधान खोजे जाने चाहिए जो पुणे की रचनात्मक विरासत को सुरक्षित रखते हुए नागरिक व्यवस्था को प्रभावित न करें।
रिपोर्टर : यश सोलंकी

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