छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का संरक्षण वर्तमान समय की आवश्यकता

पुणे : भिगवण स्थित कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय में ‘छत्रपति शिवाजी महाराज एवं महाराष्ट्र के इतिहास की निर्माण प्रक्रिया’ विषय पर आयोजित इतिहासलेखन कार्यशाला में वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में शिवकार्य की स्मृति को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में निमगांव विद्यामंदिर, माळशिरस के पूर्व मुख्याध्यापक एवं साहित्यकार हनुमंत पवार ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का कार्य महाराष्ट्र की जड़णघड़ण का आधार है। उन्होंने प्रतिपादित किया कि समाज में जाति एवं धार्मिक विद्वेष के विचारों को उत्तर देने के लिए शिवकार्य की ऐतिहासिक स्मृति को सुरक्षित रखना आवश्यक है तथा वर्तमान समय में महाराज के विचारों और कार्यों का किसी भी प्रकार से विपर्यास नहीं होने देना चाहिए। अपने उद्बोधन में उन्होंने शिवाजी महाराज के चरित्र के विविध आयामों पर प्रकाश डाला।

यह कार्यशाला सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विकास मंडल तथा इंदापुर तालुका शिक्षण प्रसारक मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। तीन सत्रों में संपन्न इस कार्यशाला में इतिहास अध्ययन के विभिन्न पक्षों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
द्वितीय सत्र में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महाविद्यालय, येरवडा के प्राध्यापक प्रा. सचिन गुळीग ने ‘डिजिटल आशय निर्माण की तकनीक’ विषय पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने ऑडियो, वीडियो एवं चित्र माध्यमों के द्वारा ऐतिहासिक सामग्री का निर्माण कर उसे डिजिटल मंचों पर प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने की तकनीक विद्यार्थियों को समझाई। प्रस्तुतिकरण के माध्यम से विभिन्न डिजिटल साधनों का परिचय कराते हुए उन्होंने डिजिटल युग में माध्यम साक्षरता की अनिवार्यता पर बल दिया।
इसी क्रम में इंदापुर स्थित कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. बाळासाहेब काळे ने ‘इंदापुर का स्थानीय इतिहास’ विषय पर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने स्थानीय इतिहास लेखन के महत्व को रेखांकित करते हुए ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों, शिलालेखों, लिखित स्रोतों, सार्वजनिक उत्सवों तथा स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अध्ययन की आवश्यकता बताई। साथ ही साक्षात्कार और प्रश्नावली के माध्यम से तथ्य संकलन की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया।
कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तानाजी मगर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। विद्यार्थी विकास अधिकारी डॉ. सुरेंद्र शिरसट ने प्रस्तावना प्रस्तुत की। संचालन प्रा. विनोद भुजबळ ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रा. श्याम सातर्ले ने किया। कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय के अध्यापक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का सहयोग रहा। कार्यशाला में महाविद्यालय के विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

रिपोर्टर : प्रकाश खोत 

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