सदल बाबा दरगाह पर सर्वधर्म इफ्तार : वारी परंपरा और मुस्लिम समुदाय ने दिया एकता व भाईचारे का संदेश
पुणे - आपसी सद्भाव और साझा आध्यात्मिक मूल्यों का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए विभिन्न धर्मों के श्रद्धालु बुधवार शाम ऐतिहासिक सदल बाबा दरगाह में एकत्र हुए। सर्वधर्म संभाव ट्रस्ट के अध्यक्ष इकराम खान के नेतृत्व में यहां रोजा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आलंदी से आए वारकरी,मुस्लिम समुदाय के सदस्य,सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए,जिन्होंने एक साथ मिलकर एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी सोहला,श्री क्षेत्र आलंदी के चोपदार राजाभाऊ रंधवे समेत अन्य वारकरी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीसीपी (जोन IV) चिलुमुला रजनीकांत, येरवडा पुलिस स्टेशन के पीआई अंजुम बागवान और लक्ष्मीनगर पुलिस स्टेशन के प्रभारी रविंद्र कदम भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस अवसर पर हज कमेटी के सीईओ शनावस सी (आईएएस), डिप्टी सीईओ सदाकत अली, नियाज अहमद तथा सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह आयोजन क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा का प्रतीक बना, जहां अलग-अलग धर्मों के लोगों ने इफ्तार में भाग लेकर शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। आलंदी से आए वारकरी भक्तों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक आयाम दिया,जो संत ज्ञानेश्वर महाराज की समावेशी विचारधारा को दर्शाता है।
इस अवसर पर बोलते हुए सर्वधर्म संभाव ट्रस्ट के अध्यक्ष इकराम खान ने कहा कि यह इफ्तार कार्यक्रम केवल धार्मिक परंपरा निभाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा, “भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। हमारे देश ने हमेशा सिखाया है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। रमजान के पवित्र महीने में रखा जाने वाला रोजा हमें धैर्य,करुणा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदना का संदेश देता है। रोजा केवल भोजन से दूर रहने का नाम नहीं है,बल्कि यह आत्मशुद्धि,इच्छाओं पर नियंत्रण और मानवता को समझने का माध्यम भी है।”
उन्होंने आगे कहा कि जब आलंदी के वारकरी और विभिन्न धर्मों के लोग सदल बाबा दरगाह में एक साथ इफ्तार करते हैं, तो यह समाज को एक मजबूत संदेश देता है कि प्रेम,सम्मान और भाईचारा ही हमारे समाज की असली नींव हैं। ऐसे प्रयासों के माध्यम से यह भावना मजबूत होती है कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय हमेशा से एक-दूसरे के त्योहारों और परंपराओं में सहभागी बनते आए हैं। इकराम खान ने यह भी बताया कि सर्वधर्म संभाव ट्रस्ट लगातार सामाजिक और सांस्कृतिक पहल के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। वारकरी समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की। संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी सोहला के चोपदार राजाभाऊ रंधवे ने इस अंतरधार्मिक आयोजन के लिए ट्रस्ट के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा,“संत ज्ञानेश्वर महाराज की शिक्षाएं समानता,करुणा और सार्वभौमिक भाईचारे पर आधारित हैं। यहां रोजा इफ्तार में भाग लेना उसी एकता और भक्ति की भावना को दर्शाता है। ऐसे कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं और यह याद दिलाते हैं कि आध्यात्मिकता किसी भी धार्मिक सीमा से परे होती है।” अन्य वारकरी प्रतिनिधियों ने भी कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में आपसी सम्मान और सौहार्द को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का समापन रोजा खोलने,शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना तथा उपस्थित लोगों के आपसी संवाद के साथ हुआ,जिससे क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत का मजबूत संदेश सामने आया।
संवादाता - यश सोलंकी

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