केडगांव (दौंड) में उपसरपंच चुनाव बना सियासी ‘थ्रिलर’, फिल्मी अंदाज़ में सदस्यों की तलाश के बाद कुल गुट की जीत
केडगांव, दौंड : दौंड तालुका की सबसे बड़ी बाजारपेठ और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले केडगांव में ग्रामपंचायत उपसरपंच पद का चुनाव इस बार जबरदस्त सियासी घमासान में बदल गया। पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा, जहां रणनीति, गायब सदस्य और तेज रफ्तार पीछा—सब कुछ देखने को मिला।
जैसे ही उपसरपंच पद के चुनाव की घोषणा हुई, स्थानीय स्तर पर सक्रिय गुटों ने अपने-अपने स्तर पर जोरदार राजनीतिक डावपेच शुरू कर दिए। इसी कड़ी में दोनों गुटों ने अपने सदस्यों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की रणनीति अपनाई। लेकिन इसी दौरान कुल गुट के दो सदस्य अचानक गायब हो गए, जिससे इलाके में खलबली मच गई।
पहले से ही ग्रामपंचायत पर विरोधी गुट का सरपंच होने के कारण कुल गुट की चिंता और बढ़ गई। ऐसे में यह आशंका जताई जाने लगी कि उपसरपंच पद भी विरोधियों के हाथ में जा सकता है। हालांकि, हार न मानने की ठानकर कुल गुट ने पूरी ताकत झोंक दी और एक सटीक रणनीति बनाई।कुल गुट ने दो अलग-अलग टीमें बनाकर गायब सदस्यों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें पुख्ता जानकारी मिली कि दोनों सदस्यों को विरोधी गुट ने एक जगह पर रखा है और उन्हें लगातार दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। सूचना मिलते ही कुल गुट की टीम ने चारपहिया वाहनों के जरिए उनका पीछा करना शुरू किया।
फिल्मी स्टाइल में हुए इस पीछा अभियान के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब दोनों गुटों की गाड़ियां आमने-सामने आ गईं और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। लेकिन कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संयम रखते हुए स्थिति को संभाला और अपने सदस्यों को विरोधी गुट के कब्जे से छुड़ाकर सुरक्षित केडगांव पहुंचाया।
आखिरकार इस पूरे सियासी ड्रामे का अंत कुल गुट के पक्ष में हुआ और भाऊसाहेब शेलार को केडगांव ग्रामपंचायत के उपसरपंच पद पर निर्विरोध चुना गया। इस जीत के पीछे कुल गुट के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सूझबूझ और एकजुटता का बड़ा योगदान रहा।इस घटनाक्रम ने केडगांव की राजनीति में नया रोमांच और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया है।
रिपोर्टर : अर्जुन मंडवाले


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