पुणे रेल मंडल में लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन
पुणे : रेल मंडल में लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। 14 अप्रैल से शुरू हुआ यह आंदोलन अब गंभीर रूप लेता जा रहा है, जिससे रेलवे सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के डिविजनल सेक्रेटरी मनीष मिश्रा ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में बताया कि:
ड्यूटी के असुरक्षित घंटे
लोको पायलटों से 9 घंटे के बजाय 13–14 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जिससे थकान बढ़ रही है।
मानसिक उत्पीड़न और धमकी
असुरक्षित ड्यूटी से मना करने पर कर्मचारियों को सजा, दबाव और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
रेस्ट नियमों का उल्लंघन
अनिवार्य आराम अवधि नहीं दी जा रही, जिससे ट्रेन संचालन की सुरक्षा खतरे में है।
प्रशासनिक दबाव का आरोप
सीनियर डीएमई (ऑपरेशन) विजय धडस के कार्यकाल में डर और दबाव का माहौल होने का आरोप।
यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा
थके हुए लोको पायलट ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
आंदोलन की स्थिति
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया गया है
कर्मचारी धरना स्थल से ही ट्रेन संचालन कर रहे हैं
रेलवे सेवा बाधित नहीं, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी
मीडिया से अपील
AILRSA ने मीडिया से मांग की है कि:
इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए लोको पायलटों की कार्य स्थितियों को उजागर किया जाए रेलवे प्रशासन की जवाबदेही तय की जाए बड़ा सवाल क्या रेलवे प्रशासन समय रहते इस गंभीर मुद्दे का समाधान करेगा? या फिर यात्रियों की सुरक्षा खतरे में बनी रहेगी? यह सिर्फ कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
रिपोर्टर : प्रभव चंद्रकांत काले

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