हडपसर के अस्पताल में बड़ा हादसा टला,ICU के पास मिला जिंदा बम जैसा उपकरण, FIR हुई दर्ज
पुणे - हडपसर स्थित उषा किरण अस्पताल में बुधवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया,जब अस्पताल के वॉशरूम में एक सक्रिय विस्फोटक उपकरण मिलने से हड़कंप मच गया। पुणे पुलिस के बम खोज एवं नाशक दस्ते (BDDS) ने समय रहते संदिग्ध वस्तु को निष्क्रिय कर सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। हडपसर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर (क्रमांक 0347) के अनुसार यह घटना 13 मई 2026 की शाम करीब 7 बजे सामने आई। अस्पताल के संचालक डॉ. विलास गायकवाड़ और प्रशासनिक समन्वयक प्रमोद भगवत भालके ICU वार्ड के पास नियमित निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान पास के पुरुष शौचालय की लाइट जलती देख वे अंदर पहुंचे।
वॉशबेसिन के नीचे उन्हें एक बेहद संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। यह उपकरण चार सफेद बेलनाकार पाइपों से बना था, जो आपस में तारों से जुड़े हुए थे और एक चलती हुई डिजिटल घड़ी से कनेक्ट थे। जब डॉ.गायकवाड़ ने सावधानीपूर्वक उस वस्तु को हिलाया, तब उसमें से टिक-टिक की आवाज सुनाई दी और डिजिटल घड़ी पर “07:21” समय दिखाई दे रहा था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अस्पताल स्टाफ ने तुरंत कार्रवाई की। डॉ. गायकवाड़ ने विस्फोटक उपकरण को एक खाली सलाइन के कार्टन बॉक्स में रखा, जबकि प्रमोद भालके अपनी जान जोखिम में डालकर उस बॉक्स को अस्पताल से बाहर ले गए और सामने खाली स्थान पर रख दिया। सूचना मिलते ही हडपसर पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। बाद में BDDS टीम ने उपकरण को अपने कब्जे में लेकर हडपसर ग्लाइडिंग सेंटर में नियंत्रित विस्फोट के जरिए नष्ट कर दिया। गुरुवार तड़के 2:11 बजे पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने लोगों की जान खतरे में डालने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अस्पताल सेवाओं को बाधित करने की नीयत से यह उपकरण रखा था।
अब तक पुलिस 17 से 18 लोगों से पूछताछ कर चुकी है और CCTV फुटेज व तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही डॉ. गायकवाड़ और पास की एक हाउसिंग सोसायटी के बीच पुराने विवाद की भी जांच की जा रही है। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि जांच अभी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मामला विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
संवादाता - यश सोलंकी


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