राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, मांगी 7 दिन में रिपोर्ट

पुणे : राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने पुणे जिले में सामने आए कथित एसिड अटैक और घरेलू हिंसा के मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के अवैध संबंध होने के शक में उसके निजी अंगों पर फर्श साफ करने वाला एसिड डाल दिया और बिना इलाज के उसे घर में बंद रखा।

शनिवार को जारी बयान में आयोग ने इस घटना को “बेहद चिंताजनक” बताया और महिलाओं के खिलाफ घरेलू क्रूरता एवं हिंसा की कड़ी निंदा की। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में तत्काल, सख्त और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है।

आयोग ने मामले में दर्ज एफआईआर, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत लगाई गई धाराएं, जांच की स्थिति, आरोपी की गिरफ्तारी व पूछताछ, पीड़िता के मेडिकल उपचार और फॉरेंसिक जांच, घटना में इस्तेमाल रासायनिक पदार्थ की बरामदगी तथा महिला की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े कदमों की जानकारी भी मांगी है।

पुलिस के अनुसार यह घटना 20 अप्रैल को पुणे जिले के उरुली कांचन क्षेत्र में हुई थी, लेकिन करीब एक महीने बाद मामला सामने आया, जब 25 वर्षीय महिला ने 15 मई को पुलिस से संपर्क कर अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने बताया कि आरोपी पेशे से वेल्डर है और उसे अपनी पत्नी पर अवैध संबंध होने का शक था। आरोप है कि काम से घर लौटने के बाद उसने गुस्से में पत्नी की पिटाई की और उसके गुप्तांगों पर फर्श साफ करने वाला एसिड डाल दिया। साथ ही घटना किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

जांच अधिकारियों के मुताबिक पीड़िता लगातार अस्पताल ले जाने की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी ने उसे इलाज कराने से रोका और घर में ही बंद रखा। बाद में महिला किसी तरह सोलापुर जिले में अपने माता-पिता के घर पहुंची, जहां उसने परिवार को पूरी घटना बताई। इसके बाद वह पुणे लौटकर पुलिस के पास गई।

महिला की शिकायत के आधार पर उरुली कांचन पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 351(2) (आपराधिक धमकी) समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि एसिड अटैक, घरेलू प्रताड़ना और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे अपराध बेहद जघन्य हैं और ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।

रिपोर्टर : यश सोलंकी 

 

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