सर्वोच्च न्यायालय में रोहित राजेश पाटील की याचिका पर नोटिस
पुणे - दौंड नगर परिषद के नगरसेवक रोहित राजेश पाटील के कुणबी जाति प्रमाणपत्र की वैधता से संबंधित मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है। इस मामले में रोहित राजेश पाटील द्वारा मुंबई उच्च न्यायालय के 30 जून 2026 के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर 17 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्न बी. वराळे की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के बाद महाराष्ट्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया। यह नोटिस 26 नवंबर 2026 को लौटाने योग्य रखा गया है।
न्यायालय ने प्रतिवादियों को आज से चार सप्ताह के भीतर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता को प्रतिवादियों के जवाब पर अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। रोहित पाटील की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता, अधिवक्ता सुशांत प्रभुणे, अधिवक्ता सक्षम माहेश्वरी, अधिवक्ता निशी सांगतानी और अधिवक्ता संकल्प सक्सेना ने पैरवी की।
इस आदेश के बाद मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के चरण में पहुंच गया है। 26 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर संबंधित पक्षों की निगाहें टिकी हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला 17 अगस्त 2026 के आदेश में दर्ज किया गया है। आगामी सुनवाई में सरकार का पक्ष और याचिकाकर्ता की ओर से दिए जाने वाले प्रतिवाद के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।
संवाददाता - प्रमोद दत्तात्रय काकडे
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