पुणे में मजदूरी करने गए सिकंदर तूरी की मौत, फैक्ट्री मालिक पर इलाज नहीं कराने का आरोप
बालूमाथ : बालूमाथ थाना क्षेत्र के पकरी गांव निवासी सिकंदर तूरी 30 वर्ष पिता धनेश्वर तूरी की महाराष्ट्र के पुणे में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों और साथ में काम करने वाले मजदूरों ने फैक्ट्री मालिक पर तबीयत खराब होने के बावजूद इलाज नहीं कराने और शव को गांव भेजने में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। जानकारी के अनुसार, सिकंदर तूरी करीब ढाई माह पूर्व मजदूरी करने पुणे गया था। वहां वह श्री ऑटो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में जेसीबी के पार्ट्स की सेटिंग का काम करता था। इसके एवज में उसे प्रतिदिन 700 रुपये मजदूरी मिलती थी। इसी बीच छह सितंबर को अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। साथ काम कर रहे मजदूरों ने इसकी सूचना फैक्ट्री मालिक को दी, लेकिन आरोप है कि मालिक ने उसके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके बाद उसके साथ काम करने वाले विनोद तूरी, छोटू तूरी, राजेंद्र तूरी, इंद्रदेव तूरी, मुकेश तूरी, उमेश तुरी और आदित्य बैठा समेत अन्य मजदूरों ने आपस में चंदा कर सिकंदर को मुंबई के राजवाड़ी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी स्थिति गंभीर हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मजदूरों का आरोप है कि मौत के बाद भी फैक्ट्री मालिक ने शव को गांव भेजने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की और न ही आर्थिक सहयोग किया। मजदूरों के अनुसार, फैक्ट्री मालिक ने बकाया मजदूरी के करीब 10 हजार रुपये देकर कहा कि वह कोई अन्य सहयोग नहीं कर सकता और जहां शिकायत करनी है, कर सकते हैं। इसके बाद गांव के ईश्वरी पासवान, सुनील तूरी और साथ गए मजदूरों ने आपस में चंदा कर करीब 60 हजार रुपये खर्च किए और एयरलाइंस के माध्यम से सिकंदर का शव रांची मंगाया। रांची से बालूमाथ के सरकारी अस्पताल के मोक्ष वाहन से शव को पकरी गांव लाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया।घटना के बाद सिकंदर तूरी के परिजनों ने लातेहार उपायुक्त से मामले की जांच कर फैक्ट्री मालिक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की है। परिजनों ने सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं और सहायता का लाभ दिलाने की भी गुहार लगाई है।
रिपोर्टर : मो० अरबाज
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