पुणे मर्डर मिस्ट्री: पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलेगा सिया और चेतन के झूठ का पिटारा?

लोनावला के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने एक बार फिर सभी को स्तब्ध कर दिया है। इस मामले में लोनावला ग्रामीण पुलिस अब जांच को तार्किक अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस का मानना है कि आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी लगातार जांच को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं और कई राज अभी भी उनकी चुप्पी के पीछे दबे हुए हैं।

वैज्ञानिक जांच का सहारा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से हुई शुरुआती पूछताछ में कई विसंगतियां सामने आई हैं। चूंकि आरोपी महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा रहे हैं, इसलिए पुलिस अब इन दोनों का 'पॉलीग्राफ टेस्ट' (लाइ डिटेक्टर टेस्ट) कराने की तैयारी कर रही है। रिमांड अवधि पूरी होते ही, जांच टीम अदालत में इस बाबत याचिका दायर कर अनुमति मांगेगी।

घटनास्थल का 'लाइव' रिक्रिएशन

जांच का दायरा बढ़ाते हुए, पुलिस टीम मुख्य आरोपी सिया गोयल को उस दुर्गम स्थान पर ले गई, जहाँ केतन अग्रवाल को मौत के घाट उतारा गया था। पुलिस का दावा है कि सिया ने वहां न केवल घटनाक्रम को दोहराया, बल्कि उस रिहर्सल का भी खुलासा किया जो केतन को चट्टान से नीचे गिराने से पहले की गई थी। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने आधिकारिक साक्ष्य जुटाने के लिए सिया के आवास पर पहुंचकर पंचनामा की प्रक्रिया भी पूरी की है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से बढ़ा संदेह

इस बीच, सिया गोयल का दिसंबर 2025 का एक पुराना वीडियो सामने आने के बाद जांच की दिशा और भी गंभीर हो गई है। वीडियो में सिया एक पब में नजर आ रही है, जहां वह किसी से फोन पर बेहद आक्रामक होकर बात कर रही है। हाथ में बोतल लिए सिया को गाली-गलौज करते और यह कहते हुए सुना जा सकता है "पहले उसने मुझे धोखा दिया, फिर उसने मुझे फोन किया।" यह वीडियो आरोपियों की आपराधिक प्रवृत्ति और उनके आपसी संबंधों के तनाव को समझने के लिए पुलिस के पास एक अहम कड़ी साबित हो सकता है।

अब आगे क्या?

दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड 3 जुलाई को समाप्त हो रही है। इस तारीख के बाद पुलिस की कार्ययोजना स्पष्ट है:

1. पॉलीग्राफ टेस्ट: अदालत से मंजूरी लेकर आरोपियों के बयानों की वैज्ञानिक पुष्टि करना।
2. साक्ष्यों का मिलान: घटना स्थल के रिक्रिएशन और पंचनामा से मिले सबूतों को आरोपी के बयानों से जोड़ना।

क्या यह पॉलीग्राफ टेस्ट केतन अग्रवाल को न्याय दिला पाएगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि पुलिस की यह वैज्ञानिक रणनीति आरोपियों के लिए मुसीबत का सबब बनने वाली है।

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