2027 नहीं, इसी साल नवंबर में होंगे पंजाब विधानसभा चुनाव? जानिए बड़ी वजह!
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब देश का सबसे बड़ा चुनावी अखाड़ा बनने जा रहा है वीरों की भूमि...पंजाब! जी हां राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जो विधानसभा चुनाव साल 2027 की शुरुआत में होने थे, वो अब समय से पहले इसी साल नवंबर में ही कराए जा सकते हैं! इस समय से पहले होने वाले महामुकाबले की भनक लगते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में हाई-लेवल मीटिंग बुलाकर पंजाब फतेह करने का एक ऐसा सीक्रेट और आक्रामक ब्लूप्रिंट तैयार किया है जिसने विरोधियों की रातों की नींद उड़ा दी है। शिरोमणि अकाली दल का साथ छूटने के बाद, बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह किसी के आगे नहीं झुकेगी और पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़कर सरकार बनाएगी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अरविंद केजरीवाल का दूसरा सबसे मजबूत गढ़ ढहने वाला है या कांग्रेस की वापसी होगी? आइए जानते हैं इस महा-दंगल की पूरी इनसाइड स्टोरी!
सियासी हलकों में चल रही फुसफुसाहट के मुताबिक, पंजाब और उत्तराखंड में फरवरी-मार्च 2027 के बजाय इसी साल नवंबर में ही चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। इस जल्दबाजी के पीछे दो बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। पहला, उत्तराखंड में 14 जनवरी से शुरू होने वाला भव्य कुंभ मेला और दूसरा, उसी समय देश में शुरू होने वाला राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण। इन दो बड़े आयोजनों के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित न हो, इसीलिए चुनाव को समय से पहले खींचने की पूरी तैयारी है। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी से लेकर कांग्रेस और बीजेपी तक, सभी ने अपनी रणनीतियों को तेज कर दिया है।
जाहिर है पश्चिम बंगाल के चुनावों में मिली बंपर जीत के बाद से बीजेपी कार्यकर्ताओं का हौसला सातवें आसमान पर है। पंजाब जैसे सिख बहुल और सीमावर्ती राज्य में पैर पसारने के लिए अमित शाह ने खुद कमान संभाल ली है। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह पंजाब में एक बहुत बड़ी और आक्रामक राजनीतिक यात्रा निकालने की तैयारी में हैं। इस यात्रा के केंद्र में पंजाब के दो सबसे दुखद और संवेदनशील मुद्दे होंगे। पहली, राज्य की पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था और दूसरा, पंजाब की जवानी को खोखला कर रहा नशा! ऐसे में अमित शाह खुद चुनाव होने तक हर महीने पंजाब का तूफानी दौरा करेंगे और जमीनी स्तर पर संगठन का काम देखेंगे। बीजेपी की इस रणनीति को धार देने के लिए हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली के कई कद्दावर नेताओं को अभी से पंजाब के चुनावी मैदान में झोंक दिया गया है।
आपको बता दें अमित शाह की चुनावी मशीनरी हमेशा माइक्रो लेवल मैनेजमेंट के लिए जानी जाती है और पंजाब के लिए भी यही चक्रव्यूह रचा गया है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने पंजाब की 117 सीटों में से 40 सीटों को पूरी तरह से लॉक कर दिया है। ये वो सीटें हैं जहां हिंदू मतदाताओं की आबादी ज्यादा है और बीजेपी इन्हें अपने लिए सबसे आसान मान रही है। इसके साथ ही, सिखों का दिल जीतने के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। पंजाब बीजेपी की कमान एक 'जट्ट सिख' चेहरे को सौंपी गई है, और सिखों तक सीधे पहुंच बनाने के लिए पार्टी ने धार्मिक मामलों पर मोर्चा खोल दिया है। पंजाब के सीमावर्ती जिलों में पाकिस्तान की तरफ से आ रहे ड्रोन और नशे के मुद्दे को बीजेपी ठीक उसी तरह उठाने जा रही है, जैसे उसने पश्चिम बंगाल में बॉर्डर पार की समस्याओं को उठाया था। वहीं दूसरी तरफ चुनाव समय से पहले होने की आहट मिलते ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने आनन-फानन में अजय माकन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बना दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पंजाब की स्थिति पर नजर रखने के लिए अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव को बतौर ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिया है, ताकि संगठन में तुरंत बदलाव किए जा सकें। कांग्रेस किसी भी कीमत पर पंजाब को दोबारा जीतकर अपनी खोई हुई साख वापस पाना चाहती है। दूसरी तरफ, दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए अपना दूसरा गढ़ पंजाब बचाना जिंदगी और मौत का सवाल बन गया है।
देखा जाए तो पंजाब की इस पवित्र और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील धरती पर त्रिकोणीय मुकाबले का ऐसा बारूद इकट्ठा हो चुका है, जिसमें नवंबर के महीने में भयंकर विस्फोट होना तय है। एक तरफ जहाँ अरविंद केजरीवाल अपनी साख बचाने के लिए वाहेगुरु की शरण में हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने पुराने किले को वापस हथियाने के लिए तड़प रही है। लेकिन इन सबके बीच, अमित शाह के चाणक्य नीति वाले चक्रव्यूह और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे आक्रामक चेहरों के दम पर बीजेपी वो इतिहास रचने की फिराक में है, जो वो पिछले कई दशकों में नहीं कर पाई। अब देखना यह होगा कि पंजाब की जनता इस बार किस पार्टी की पतंग उड़ाती है और किसके धागे काटती है! चंडीगढ़ के सिंहासन पर कौन बैठेगा, इसका फैसला अब बहुत दूर नहीं है!
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