Paper Leak से हिली पंजाब सरकार! हाईटेक नकल कांड का सबसे बड़ा खुलासा
देश भर के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का जो भयानक खेल शुरू हुआ था, उसकी आग अब पूरे देश में फैल चुकी है! जी हां अभी दिल्ली में नीट और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली और घोटालों का धुआँ पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था...जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चला छात्रों का उग्र प्रदर्शन अभी-अभी खत्म हुआ था और मोदी सरकार को झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक का इस्तीफा लेना पड़ गया था...कि अब पंजाब की सरजमीं से पेपर लीक और हाई-टेक चीटिंग का ऐसा भयानक परमाणु बम फूटा है, जिसने भगवंत मान सरकार को हिलाकर रख दिया है! आखिर क्या है पंजाब की उन दो बड़ी सरकारी भर्तियों का सच, जिसने चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है? कैसे 3.5 लाख से 13 लाख रुपये में बोली लग रही थी? कैसे हरियाणा और राजस्थान के कंट्रोल रूम से पंजाब की परीक्षाओं को हैक किया जा रहा था? और जंतर-मंतर से जीत दर्ज करने के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी पंजाब के इस मुद्दे पर क्या बड़ा धमाका करने जा रही है? आइए जानते हैं।
आपको बता दें पंजाब में इस वक्त सियासी पारा 44 डिग्री से भी ऊपर पहुँच चुका है! विपक्ष चाहे कांग्रेस हो, भारतीय जनता पार्टी हो या फिर शिरोमणि अकाली दल सबने एक सुर में मोर्चा खोल दिया है और भगवंत मान सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्ष का सीधा और तीखा आरोप है कि पंजाब में एक के बाद एक परीक्षाओं के पर्चे बेचे जा रहे हैं, सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है और युवा बेरोजगारी की आग में झुलस रहे हैं! विपक्षी दल अब सीधे-सीधे पंजाब के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ गए हैं। लेकिन दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ढाल बनकर मैदान में उतर आए हैं! सरकार का दावा है कि पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ! हमने तो अपनी मुस्तैदी से उस हाई-टेक नकल माफिया के फन को कुचला है, जो जुराबों, पगड़ियों में ब्लूटूथ और स्पाई-कैमरे छिपाकर सिस्टम को सेंध लगाने आए थे!
दरअसल, पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 फार्मेसी अफसरों की भर्ती का मामला अब सरकार के लिए गले की हड्डी बन चुका है। हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने फिरोजपुर, फरीदकोट और कोट कपूरा के 18 सेंटरों पर यह परीक्षा कराई, जिसमें करीब 5,000 से 7,000 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाने पहुँचे थे। लेकिन पर्चा शुरू होने के महज कुछ ही मिनटों के भीतर स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस और पुलिस की फ्लाइंग स्क्वाड टीमों ने धावा बोल दिया! सेंटरों में जो नजारा दिखा, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। अभ्यर्थी सामान्य परीक्षार्थी नहीं, बल्कि पूरे हाई-टेक जासूस बने हुए थे! जी हां परीक्षार्थी अपनी पगड़ियों, जुराबों और अंडरगारमेंट्स में बटन वाले छोटे वायरलेस ब्लूटूथ डिवाइस छिपाकर लाए थे। फिरोजपुर के एक सेंटर से जासूस पेन-कैमरे के जरिए प्रश्नपत्र को स्कैन करके व्हाट्सएप पर बाहर भेज रहे थे। इतना ही नहीं हरियाणा और राजस्थान से बकायदा कंट्रोल रूम ऑपरेट हो रहे थे, जहाँ से बाहर बैठे सॉल्वर सीधे अभ्यर्थियों के कान में ब्लूटूथ के जरिए जवाब फुसफुसा रहे थे! इस धंधे में प्रति कैंडिडेट 3.5 लाख से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूले गए थे! पुलिस ने रेड मारकर 7 मुख्य साजिशकर्ताओं समेत 35 लोगों को दबोचा, 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया और 27 से ज्यादा वायरलेस ब्लूटूथ डिवाइस बरामद किए।
वहीं अब विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह पूरी तरह से पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी है, इसलिए राज्य के शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री तुरंत अपना इस्तीफा दें! वहीं, पंजाब प्रशासन और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद की दलील है कि यह प्री-एग्जाम पेपर लीक नहीं था, बल्कि परीक्षा के दौरान रियल-टाइम हाई-टेक चीटिंग थी, जिसे पुलिस की मुस्तैदी से टाइम रहते ध्वस्त कर दिया गया। आपको बता दें बवाल सिर्फ फार्मेसी अफसरों तक सीमित नहीं है। कृषि विभाग में कृषि विकास अधिकारी की भर्ती परीक्षा को लेकर भी भारी महाभारत छिड़ी हुई है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के सेट पहले ही लीक कर दिए गए थे। जब बात बिगड़ने लगी, तो मामले को दबाने के लिए असामान्य तरीके से ग्रेस मार्क्स बाँट दिए गए! कृषि स्नातकों और युवा अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किए। वहीं अगर पंजाब के पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में पहले भी कई बार ऐसे कांड हो चुके हैं:
2022 नायब तहसीलदार भर्ती: ब्लूटूथ चीटिंग के भयानक हंगामे के बाद पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।
2023 PSTET परीक्षा ब्लंडर: प्रश्नपत्र में उत्तर खुद-ब-खुद बोल्ड होकर छप गए थे! शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस को खुद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और दो अफसर सस्पेंड हुए थे।
2023 12वीं बोर्ड परीक्षा: अंग्रेजी का पर्चा परीक्षा शुरू होने से महज 1 घंटा पहले लीक हो गया था, जिसे आनन-फानन में रद्द करना पड़ा था।
आपको बता दें भले ही 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का धरना-प्रदर्शन अब समाप्त हो गया हो लेकिन CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके शांत बैठने के मूड में नहीं हैं! उन्होंने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात की है और सीधे चेतावनी दी है कि वे बहुत जल्द अपनी आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे। अभिजीत दीपके का कहना है कि वे पंजाब के इस कथित पेपर लीक और नकल कांड के मुद्दे पर भी बड़ा फैसला लेने जा रहे हैं और सरकार से बातचीत कर रहे हैं ताकि किसी भी मासूम स्टूडेंट पर गलत FIR न दर्ज हो। वहीं दूसरी तरफ चौतरफा घिरी आम आदमी पार्टी की सरकार अब पूरे आक्रामक मोड में आ गई है। आप नेता मनीष सिसोदिया ने विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि यह सब बीजेपी और कांग्रेस का फैलाया हुआ प्रोपेगेंडा है। सिसोदिया ने कड़े लहजे में कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। कांग्रेस और बीजेपी के पेड ट्रॉल्स सोशल मीडिया पर अफवाहें फैला रहे हैं।
वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी विरोधियों को सीधा जवाब देते हुए कहा कि "हमारी सरकार बने साढ़े चार साल हो चुके हैं और पंजाब में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। वहीं केजरीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस के इन आरोपो को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ।
वहीं अब इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पंजाब में हुआ क्या? अगर सरकार की बात मानें तो यह पेपर लीक नहीं बल्कि परीक्षा के दौरान की गई हाईटेक नकल थी। लेकिन विपक्ष का कहना है कि चाहे पेपर परीक्षा से पहले बाहर जाए या परीक्षा के दौरान, दोनों ही स्थिति में जिम्मेदारी सरकार और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की बनती है। क्योंकि लाखों युवा सालों तक मेहनत करके सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं तो भरोसा टूटता है। फिलहाल पंजाब में यह मुद्दा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा बल्कि राजनीतिक लड़ाई का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
एक तरफ विपक्ष पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगा रहा है...तो दूसरी तरफ सरकार इसे हाईटेक नकल गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बता रही है। आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई से साफ होगा कि यह मामला सिर्फ नकल गिरोह तक सीमित था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। क्या दोषियों पर बड़ी कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी राजनीति के आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाता है।
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