कम वक्त में ज्यादा पैदावार, बैगन की ये वैरायटी है खास...

आजकल लोग अपने घर की छत, बालकनी या किचन गार्डन में हाइब्रिड सब्जियां उगाना काफी पसंद कर रहे हैं। इसी कड़ी में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की पूसा लैब ने सफेद बैंगन की एक बेहतरीन उन्नत किस्म विकसित की है। यह वैरायटी न सिर्फ कम समय में तैयार होती है, बल्कि पारंपरिक बैंगन के मुकाबले कहीं ज्यादा उत्पादन भी देती है। छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के साथ-साथ होम गार्डनिंग करने वालों के लिए भी यह किस्म बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।
 
मुख्य विशेषताएं और फायदे
 
तेजी से उत्पादन: बीज बोने के मात्र 50 से 55 दिनों के भीतर फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।
बाजार में भारी मांग: सफेद बैंगन अपनी अनोखी रंगत और स्वाद के कारण मार्केट में अलग पहचान रखता है, जिससे इसके अच्छे दाम मिलते हैं।
प्रतिकूल मौसम में भी मददगार: जिन इलाकों में पानी की कमी या मौसम का उतार-चढ़ाव रहता है, वहाँ भी यह किस्म शानदार परिणाम देती है।
सस्ता और सुलभ बीज: राष्ट्रीय बीज निगम इसके उत्तम दर्जे के बीज ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। आप घर बैठे इसके 10 ग्राम बीज मात्र ₹80/- में ऑर्डर कर सकते हैं।
 
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, पूसा व्हाइट बैंगन से शानदार उपज लेने के लिए अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त धूप और संतुलित खाद-उर्वरक का होना बेहद जरूरी है। रोपाई से पहले बीजोपचार और समय पर सिंचाई इसकी सफलता की मुख्य कुंजी है।
 
 सफेद बैंगन की बुवाई का सही तरीका
 
यदि आप इस उन्नत किस्म से बेहतरीन पैदावार चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
 
1. बुवाई का सही समय
 
उत्तर भारत में फरवरी-मार्च या जून-जुलाई का महीना बुवाई के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। वहीं दक्षिण भारत में  मौसम अनुकूल होने के कारण लगभग साल भर इसकी बुवाई की जा सकती है।
 
2. नर्सरी और मिट्टी की तैयारी
 
क्यारियों का आकार: पौधे तैयार करने के लिए 1 से 1.5 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी क्यारियां बनाएं। मिट्टी को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरी कर लें। अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी लें। इसमें पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद, वर्मीकंपोस्ट और थोड़ी रेत मिलाएं। 
 
3. बीजोपचार और बुवाई की विधि
 
रोगों से सुरक्षा: पौधों को शुरुआती बीमारियों से बचाने के लिए बीजों को थिरम से अच्छी तरह उपचारित करें। बीजों को मिट्टी में 0.5 से 1 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। अगर आप सीडलिंग ट्रे का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो प्रति सेल/छेद में 4-5 बीज डाल सकते हैं। बुवाई के बाद हल्का पानी दें। ध्यान रखें कि मिट्टी में सिर्फ नमी बनी रहे, जलभराव बिल्कुल न हो। लगभग 10 से 15 दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर फूटने लगते हैं।

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