पुत्रदा एकादशी 2025: संतान सुख और पुण्यकारी व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र व्रतों में से एक है। यह एकादशी, शुक्ल पक्ष की ग्यारवीं तिथि को मनाई जाती है और इसे विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और उपवास का बड़ा महत्व है।

पुत्रदा एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से:

  • संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • पितरों और पूर्वजों को शांति मिलती है।
  • जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य आता है।

पुराणों में वर्णित है कि यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए लाभकारी है जो संतान सुख की कामना करते हैं।

पुत्रदा एकादशी व्रत की विधि

इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति भाव से रखना चाहिए। व्रत की मुख्य विधि इस प्रकार है:

1. स्नान और तैयारी:
   सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें।

2. उपवास:
   पूरा दिन निर्जला उपवास रखें या केवल फल और जल का सेवन करें।

3. पूजा विधि:

   भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
   विष्णु स्तुति का पाठ करें और संतान सुख के लिए प्रार्थना करें।

4. दान और सेवा:
   गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य सामग्री दान करें।

5. संध्या पूजा:
   शाम को पुनः भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें।

विशेष उपाय: तुलसी का पौधा घर में रखें और तुलसी के पत्ते दान करने से व्रत का फल दोगुना बढ़ जाता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत एक अत्यंत पुण्यकारी व्रत है। इसे भक्ति भाव से करने वाले व्यक्तियों को संतान सुख के साथ जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है। इस एकादशी का महत्व केवल संतान सुख तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और शांति लाने वाला व्रत भी है।

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