PWD ऑफिस में ‘आग’ या ‘आड़’? फाइलें जलीं या सच छुपाया गया!

लखनऊ के PWD मुख्यालय में आग लगने की घटना अब सवालों के घेरे में है। जहां विभाग इसे मामूली तकनीकी खराबी बताकर किसी नुकसान से इनकार कर रहा है। वहीं सूत्रों का दावा है कि इस आग में सड़क निर्माण से जुड़े अहम दस्तावेज और उपकरण जलकर खाक हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित कर दी गई है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 19 मार्च की रात निर्माण भवन स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय परिसर के कक्ष संख्या A-014 में कंप्यूटर उपकरण में आग लगी। 20 मार्च की सुबह जब कमरे को खोला गया तो अंदर धुआं भरा हुआ था, हालांकि तब तक आग खुद ही बुझ चुकी थी। विभाग ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई किए जाने का दावा किया है।

PWD अधिकारियों का कहना है कि आग केवल एक कमरे तक सीमित रही और आसपास के किसी अन्य कक्ष में नहीं फैली। विभाग के मुताबिक किसी भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या अभिलेख को नुकसान नहीं पहुंचा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

परियोजनाओं के दस्तावेज जले

वहीं, विभागीय सूत्र इस दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि आग में प्रदेश स्तर की सड़क परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, आगणन फाइलें और कंप्यूटर उपकरण जल गए। हाल के महीनों में करोड़ों के टेंडर जारी हुए थे, जिनमें कई मामलों को लेकर विवाद भी सामने आए थे। ऐसे में आग की घटना को लेकर संदेह गहरा गया है।

सुरक्षा व्यवस्था और वायरिंग पर उठे सवाल

घटना के बाद कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि भवन की वायरिंग लंबे समय से खराब थी और कई बार एस्टीमेट बनने के बावजूद उसे ठीक नहीं कराया गया। आग लगने के संभावित कारणों में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है।

फायर ब्रिगेड को सूचना नहीं देने पर भी विवाद
आग लगने के दौरान फायर ब्रिगेड को सूचना नहीं दी गई और विभागीय कर्मचारियों ने खुद ही आग बुझाने का प्रयास किया। यह सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी मानी जा रही है।

दो सदस्यीय जांच समिति गठित, तीन दिन में रिपोर्ट

पूरे मामले की जांच के लिए अधीक्षण अभियंता चन्द्रशेखर और अधिशासी अभियंता मुनेश्वर सिंह की दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आग का असली कारण क्या था और नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है।

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