किसानों के लिए चेतावनी: मध्य पूर्व संघर्ष ने बढ़ाया उर्वरक संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण इस क्षेत्र के कई फर्टिलाइज़र (उर्वरक) संयंत्र बंद हो गए हैं और शिपिंग रास्ते भी गंभीर रूप से बाधित हुए हैं। इसका सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो उर्वरक आयात करते हैं, जैसे भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया। इन देशों में किसानों के लिए अनाज की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है, इसलिए उर्वरक की कमी उनकी फसल को प्रभावित कर सकती है।
उत्पादन और शिपिंग पर असर
इस संकट का कारण सिर्फ शिपिंग मार्गों का रुक जाना नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले पारगमन में बाधा और उत्पादन में कटौती ने वैश्विक आपूर्ति को और मुश्किल बना दिया है।
कतर एनर्जी (Qatar Energy) को अपने यूरिया प्लांट का उत्पादन रोकना पड़ा क्योंकि उसके LNG संयंत्रों पर हमले हुए और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बंद हो गई। इसी तरह मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में सल्फर उत्पादन में भी कमी आई है।
वैश्विक निर्यातकों पर असर
विश्लेषकों का कहना है कि कतर, ईरान और सऊदी अरब जैसे बड़े यूरिया और एनहाइड्रस (निर्जल) निर्यातक अब पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं। इसका मतलब है कि वैश्विक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गायब हो गया है।
भारत पर असर
भारत मध्य पूर्व से अपने यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरक का 40% से अधिक हिस्सा आयात करता है। हाल ही में भारत ने 13 लाख टन यूरिया खरीदने का सौदा किया है, लेकिन इस संकट की वजह से समय पर सप्लाई आने का जोखिम है। देश के कुछ यूरिया संयंत्रों ने एलएनजी की कमी के कारण उत्पादन घटा दिया है। इसका असर अल्पकालिक रूप से यूरिया और डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) की उपलब्धता पर पड़ेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि संकट अल्पकालिक हो सकता है और भारत जरूरत पड़ने पर रूस से अतिरिक्त उर्वरक आयात करने पर विचार कर सकता है। अगर प्राकृतिक गैस की कीमतें कम होती हैं तो घरेलू उत्पादन फिर से बढ़ सकता है।
पहले से ही तंग था बाजार
वैश्विक उर्वरक बाजार पहले से ही काफ़ी दबाव में था। चीन ने अपनी घरेलू जरूरतों के लिए निर्यात सीमित कर दिया है और यूरोप में सस्ते रूसी गैस की कमी के कारण उत्पादन घट गया था। यूरिया की कीमत पहले लगभग 470 डॉलर प्रति टन थी, अब यह लगभग 80 डॉलर बढ़कर और महँगी हो गई है।
चीन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें
चीन अपने सल्फर आयात का आधा हिस्सा मध्य पूर्व से लाता है।
इंडोनेशिया को अपनी फॉस्फेटिक जरूरतों के लिए 70% आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है और बुवाई का मौसम नज़दीक होने के कारण उन्हें आपूर्ति जल्दी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों के लिए फर्टिलाइज़र की उपलब्धता चुनौतीपूर्ण हो जाएगी, और यह किसान समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है।

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