श्मशान में QR कोड! क्या अब मुर्दों से भी वसूलेगी सरकार?


दंतेवाड़ा नगर पालिका की एक डिजिटल पहल अब विवादों में घिर गई है। टैक्स कलेक्शन को आसान बनाने के लिए शहर में घरों और दुकानों के बाहर QR कोड लगाने का अभियान चलाया जा रहा था, लेकिन इस प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आई। ठेका कंपनी के कर्मचारियों ने एक सार्वजनिक श्मशान घाट के पिलर पर भी टैक्स भुगतान से जुड़ा QR कोड चिपका दिया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि उस कोड पर श्मशान घाट की बजाय ‘सुरभि कॉलोनी’ का नाम दर्ज था। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस जगह को गलत तरीके से एक रिहायशी संपत्ति के रूप में दर्ज कर लिया गया था।

नियमों के अनुसार, श्मशान घाट जैसी सार्वजनिक संपत्तियां पूरी तरह टैक्स फ्री होती हैं और इन पर किसी तरह का प्रॉपर्टी टैक्स लागू नहीं होता। ऐसे में वहां टैक्स कोड लगाना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर बड़ी चूक भी दर्शाता है।

जैसे ही यह मामला लोगों के सामने आया, नगर पालिका की आलोचना शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए विरोध जताया। बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। नगर पालिका के सीएमओ पाल दास ने इसे मानवीय गलती बताते हुए QR कोड हटाने के निर्देश दिए।

जांच में सामने आया कि डेटा एंट्री और फील्ड सर्वे के दौरान ठेका कंपनी की ओर से गड़बड़ी हुई, जिसके चलते श्मशान घाट को गलत कैटेगरी में डाल दिया गया। फिलहाल, इस पूरी घटना ने डिजिटल टैक्स सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि दंतेवाड़ा में करीब 4600 संपत्तियों को इस योजना के तहत शामिल किया जाना है, लेकिन कई जगहों पर गलत कोड लगाए जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं। इस मामले ने साफ कर दिया है कि बिना सही जांच-पड़ताल के डिजिटल व्यवस्था लागू करने से ऐसी गंभीर गलतियां सामने आ सकती हैं, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.