स्वस्थ आय के लिए क्विनोआ की खेती कैसे करें

क्विनोआ, जिसे सुपरफूड के नाम से जाना जाता है, स्वास्थ्यवर्धक पोषक तत्वों से भरपूर अनाज है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह ग्लूटेन-फ्री होता है और कई लोगों के लिए पोषण का बेहतरीन स्रोत है। क्विनोआ की खेती भारत में भी बढ़ती लोकप्रियता पा रही है।

क्विनोआ की खेती के लिए आवश्यक जानकारी

1. मौसम और जलवायु

क्विनोआ ठंडी और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह उगती है।
तापमान 15–25°C के बीच अनुकूल रहता है।
अत्यधिक गर्म या नमी वाला मौसम फसल को नुकसान पहुँचा सकता है।

2. मिट्टी की आवश्यकता

क्विनोआ ढीली, उपजाऊ और जल निकासी वाली मिट्टी में बेहतर उगती है।
मिट्टी का pH 6–8 के बीच होना चाहिए।
बलुई या चिकनी मिट्टी में भी यह फसल उगाई जा सकती है।

3. बुवाई का समय और तरीका

बुवाई का समय मानसून या ठंडी ऋतु में उपयुक्त होता है।
बीज को 2–3 सेमी गहरे बोया जाता है।
रोपाई या सीधे बुवाई दोनों तरीके अपनाए जा सकते हैं।

4. सिंचाई और पोषण

क्विनोआ को हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है।
पानी की अधिकता फसल में सड़न और रोग पैदा कर सकती है।
जैविक खाद और उर्वरक फसल की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।

5. कीट और रोग नियंत्रण

क्विनोआ में कम कीट और रोग लगते हैं, लेकिन अफिड, जंग और पत्ती की सड़न से सावधान रहें।
जैविक और रासायनिक उपायों से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

6. फसल कटाई और उपज

क्विनोआ की फसल लगभग 90–120 दिन में तैयार होती है।
जब बीज कठोर और सूखे हो जाएं, तब फसल काटी जाती है।
औसतन 1 हेक्टेयर से 800–1200 किग्रा क्विनोआ उपज मिल सकती है।

7. बाजार और फायदे

क्विनोआ की मांग बढ़ रही है क्योंकि यह स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए अच्छा माना जाता है।
इसे पैकेजिंग करके, ब्रांडेड फॉर्म में या हरे क्विनोआ के रूप में बेचा जा सकता है।
आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा के लिए यह फसल लाभकारी है।

क्विनोआ की खेती कम निवेश, कम कीट और रोग की समस्या के साथ एक लाभकारी विकल्प है। स्वास्थ्यवर्धक और ग्लूटेन-फ्री फसल होने के कारण इसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। किसान इसे अपनाकर आय में वृद्धि कर सकते हैं और पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.