जब भारत ने कहा—“करो या मरो”
“अंग्रेज़ों, भारत छोड़ो!”
यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिल की आवाज़ थी। वर्ष 1942 में जब दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की आग में जल रही थी, तब भारत में भी स्वतंत्रता की ज्वाला तेज़ हो चुकी थी। अब भारतीय केवल आज़ादी की माँग नहीं कर रहे थे—वे उसे हर कीमत पर हासिल करने के लिए तैयार थे।
इसी ऐतिहासिक संघर्ष को हम भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त क्रांति के नाम से जानते हैं।
आखिर क्यों शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने भारतीय नेताओं और जनता की सहमति के बिना भारत को युद्ध में शामिल कर दिया। इससे देश में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष और बढ़ गया।

इसी बीच 1942 में ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन को भारत भेजा। भारतीय नेताओं को उम्मीद थी कि इससे स्वतंत्रता का कोई ठोस रास्ता निकलेगा, लेकिन मिशन के प्रस्ताव भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सके।
महात्मा गांधी समझ चुके थे कि अब केवल बातचीत से काम नहीं चलेगा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत को अब तत्काल स्वतंत्रता चाहिए।
8 अगस्त 1942: एक ऐतिहासिक पुकार
8 अगस्त 1942 को बंबई (वर्तमान मुंबई) के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की ऐतिहासिक बैठक हुई। यहाँ भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया गया।
महात्मा गांधी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक ऐसा संदेश दिया, जो इतिहास में अमर हो गया....
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