खाली खेतों में शुरू करें रबी की तैयारी, होगी बंपर कमाई
खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेत खाली होना किसानों के लिए अगली फसल की तैयारी का सबसे सही समय माना जाता है। अगर किसान पारंपरिक फसलों से हटकर रबी सीजन में बेहतर कमाई करना चाहते हैं, तो गाजर, हरी मटर और सरसों की अगेती खेती विकल्प हो सकती है। सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्टूबर की शुरुआत तक का मौसम इन फसलों की बुआई के लिए अनुकूल माना जाता है। हल्की ठंडक से बीजों के अंकुरण और पौधों की शुरुआती बढ़वार में मदद मिलती है। अगेती फसल बाजार में पहले पहुंचने पर किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना रहती है, इसलिए खेत की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण बीज का चुनाव समय रहते करना जरूरी है।
अगेती गाजर की खेती
गाजर की अगेती खेती के लिए भुरभुरी और रेतीली दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकासी अच्छी हो, बेहतर मानी जाती है। खेत की दो-तीन बार जुताई कर मिट्टी को बारीक करें और प्रति एकड़ करीब 4 से 5 टन सड़ी गोबर की खाद मिलाएं। गाजर की बुआई समतल खेत में छिड़काव के बजाय 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंची मेड़ों यानी रिज पर करना बेहतर रहता है, इससे जड़ों को फैलने की पर्याप्त जगह मिलती है और गाजर का आकार व रंग अच्छा रहता है। बुआई से पहले बीज उपचार करना चाहिए। हल्की सिंचाई और समय पर खरपतवार नियंत्रण के साथ फसल लगभग 75 से 90 दिनों में तैयार हो सकती है।
अगेती हरी मटर से कम समय में उत्पादन
ठंड की शुरुआत में हरी मटर की बाजार में अच्छी मांग रहती है। अगेती किस्मों की बुआई समय पर करने पर नवंबर के आसपास पहली तुड़ाई शुरू हो सकती है। खेती के लिए काशी मुक्ति, काशी अगेती और अर्ली विस्कॉन्सिन जैसी प्रमाणित किस्मों का चुनाव किया जा सकता है। बुआई से पहले खेत में आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से पौधों की बढ़वार में मदद मिल सकती है। सामान्यतः लाइनों के बीच करीब 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर दूरी रखी जाती है। अच्छी देखभाल में मटर की अगेती फसल करीब 60 दिनों में उत्पादन देना शुरू कर सकती है।
अगेती सरसों से बढ़ाएं मुनाफे के अवसर
रबी सीजन में सरसों को भी नकदी फसल के रूप में लगाया जा सकता है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में बुआई के लिए क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त और प्रमाणित किस्मों का चयन करें। पूसा सरसों, आरएच-30 और गिरिराज जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जाता है। बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है और प्रति एकड़ करीब 1.5 से 2 किलोग्राम बीज पर्याप्त हो सकता है। बेहतर उत्पादन के लिए सल्फर सहित आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति पर ध्यान देना चाहिए। लाइनों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है। समय पर तैयार होने वाली सरसों की फसल के बाद किसान क्षेत्र और मौसम के अनुसार अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं।
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