राघव चड्ढा का वोटर लिस्ट से नाम गायब! पंजाब में SIR पर सियासी घमासान
वोटर लिस्ट में नाम होना किसी भी लोकतांत्रिक देश में सिर्फ एक कागजी औपचारिकता नहीं...बल्कि ये उस नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार की पहचान है...लेकिन जब इसी वोटर लिस्ट से किसी मौजूदा सांसद का नाम गायब हो जाए... तो सवाल उठना लाजिमी है। और अब पंजाब की राजनीति में वोटर लिस्ट को लेकर ऐसा ही एक बड़ा बवाल खड़ा हो गया है...जी हां... राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम चुनाव आयोग की SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत जारी पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। इतना ही नहीं...उनके नाम के आगे लिखा गया है.....स्थायी रूप से स्थानांतरित। बस फिर क्या था...वोटर लिस्ट से नाम गायब होते ही पंजाब की सियासत में आरोपों का ऐसा बम फूटा कि आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा आमने-सामने आ गए। राघव चड्ढा का आरोप है कि ये कोई गलती नहीं...बल्कि राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। वहीं आम आदमी पार्टी पलटवार करते हुए कह रही है कि SIR पंजाब सरकार नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। राज्य सरकार का वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का कोई अधिकार नहीं।
दरअसल, चुनाव आयोग की ओर से 13 अगस्त 2026 को पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई। इसी ड्राफ्ट लिस्ट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं दिखाई दिया। रिकॉर्ड में उनके नाम के सामने स्थायी रूप से स्थानांतरित दर्ज है। यानी उन्हें स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित मतदाता के तौर पर मार्क किया गया है। उनका नाम ASDD श्रेणी में डाल दिया गया है। आपको बता दें इसे लेकर सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं।
और इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
वहीं अब आते हैं राघव चड्ढा के आरोपों पर...दरअसल, राघव चड्ढा ने इस पूरी कार्रवाई को 'राजनीतिक बदले की भावना' से जोड़ दिया है। उनका आरोप है कि चुनावी ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और करियर से जुड़े फैसलों पर राज्य सरकार का प्रभाव रहता है और इसी दबाव का इस्तेमाल राजनीतिक बदले के लिए किया जा रहा है। आपको बता दें राघव चड्ढा ने सिर्फ वोटर लिस्ट तक ही आरोप सीमित नहीं रखे। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने और कुछ अन्य नेताओं ने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा है, तब से आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनके खिलाफ हो गया है।
हालांकि ये राघव चड्ढा के आरोप हैं, जिन पर AAP ने कड़ा पलटवार किया है। AAP ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग कराता है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किसका नाम रहेगा और किसका नाम हटेगा, इसका फैसला राज्य सरकार नहीं करती। AAP का कहना है कि अगर किसी तरह की गैर-कानूनी या बैकडेट एंट्री कराने की कोशिश हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पूरा सच जनता के सामने आना चाहिए। आपको बता दें राघव चड्ढा साल 2022 में AAP के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। राज्यसभा सदस्य बनने से पहले उनके चुनावी हलफनामे में दिल्ली के राजिंदर नगर का मतदाता विवरण दर्ज होने की बात सामने आई थी।
पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनका नाम पंजाब की वोटर लिस्ट में भी शामिल हुआ। बताया गया है कि 1 जून 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मोहाली के एक बूथ पर मतदान किया था। यानी अब विवाद इस बात पर भी है कि उनका वोटर रजिस्ट्रेशन किस राज्य में और किस आधार पर बना रहना चाहिए था। वहीं राघव चड्ढा कभी आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल थे और अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी माने जाते थे। लेकिन अप्रैल 2026 में उन्होंने BJP का दामन थाम लिया। यहीं से राजनीतिक समीकरण बदल गए। दिलचस्प बात ये है कि 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान राघव चड्ढा खुद AAP नेताओं के साथ वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे थे। और अब... वही राघव चड्ढा खुद वोटर लिस्ट विवाद के केंद्र में हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो एक तरफ जहां राघव चड्ढा इस कार्रवाई को पंजाब सरकार की 'बदले की राजनीति' बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी इसे नियमों के तहत हुई कार्रवाई और चड्ढा की अपनी लापरवाही करार दे रही है! अब देखना यह होगा कि 12 सितंबर तक दावों और आपत्तियों के खेल में राघव चड्ढा का नाम पंजाब की फाइनल लिस्ट में वापस जुड़ता है या फिर दिल्ली की वोटर लिस्ट में उनकी वापसी होती है!
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