सुधांशु त्रिवेदी रामलला के दर्शन के बाद विपक्ष पर बरसे

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी अयोध्या पहुंचे और रामलला का दर्शन पूजन किया। इसके बाद, उन्होंने निर्माणाधीन रामायण विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर सुधांशु त्रिवेदी ने कई महत्वपूर्ण बयान दिए।सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रामलला की विराजमान होने की एक वर्षगांठ पूरी हो चुकी है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पहले विपक्ष यह कहता था कि "रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन तारीख नहीं बताएंगे", लेकिन अब विपक्ष तारीख के रहस्य को समझ नहीं पा रहा। उनका मानना था कि रामलला खुद भी इस दिन का इंतजार कर रहे थे, जब उनका प्राण प्रतिष्ठित होगा और अयोध्या का नाम फैजाबाद से बदलकर अयोध्या होगा।सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि जो राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं हुए, वे सबसे बड़े अभागे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी यह नहीं कहा कि वह राम मंदिर में आएंगे, बल्कि बाबर की मजार पर जाकर सजदा किया। त्रिवेदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि 1959 में जवाहरलाल नेहरू, 1968 में इंदिरा गांधी और 2005 में राहुल गांधी बाबर की मजार पर गए थे।इसके अलावा, उन्होंने महाकुंभ और वक्फ कानून पर भी अपने विचार व्यक्त किए। सुधांशु त्रिवेदी ने वक्फ को भारत के सेकुलर संविधान पर एक "थोपा गया कानून" बताया और कहा कि वक्फ का इस्तेमाल भारत की जनता के हित में नहीं बल्कि एक विशेष समूह के लिए किया गया है।सुधांशु त्रिवेदी ने रामायण विश्वविद्यालय को एक बेहतरीन पहल बताया और कहा कि यह भारत के प्राचीन ज्ञान और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा।
सुधांशु त्रिवेदी के अयोध्या दौरे और उनके बयानों ने राजनीतिक चर्चा को एक नया मोड़ दिया है। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही अयोध्या का नाम इतिहास में दर्ज हो जाएगा, और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
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