'एक साल में तय है पीएम मोदी की विदाई', बंद कमरे की बैठक से लीक हुआ बयान
नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस की अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बैठक में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है, जिसकी धमक सीधे प्रधानमंत्री आवास तक सुनाई दी है। राहुल गांधी ने बंद कमरे में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के सामने वो दावा कर दिया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। जी हां राहुल ने दोटूक कहा कि "अगले एक साल के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदाई तय है! एक साल बाद नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे।" राहुल गांधी के इस बयान के बाहर आते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी तोपें विपक्ष की तरफ खोल दी हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभालते हुए राहुल गांधी पर सीधा और बेहद गंभीर हमला बोला है। उन्होंने इसे कोई साधारण बयान नहीं, बल्कि भारत को अस्थिर करने और देश में अराजकता व हिंसा फैलाने की एक बहुत बड़ी 'अंतरराष्ट्रीय साजिश' करार दिया है।
दरअसल, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा आयोजित करीब दो घंटे से ज्यादा चली। इस मैराथन बैठक में राहुल गांधी पूरे आक्रामक मूड में नजर आए। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने पीएम मोदी की विदाई के पीछे ज्योतिषीय नहीं, बल्कि कड़े आर्थिक और सामाजिक कारण गिनाए, जैसे...
वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक हालात भारत की सत्ता को हिलाकर रख देंगे।
देश के भीतर लगातार बढ़ रहा आर्थिक असंतोष और जनता में पनप रहा गुस्सा मोदी सरकार के पतन का सबसे बड़ा कारण बनेगा।
राहुल गांधी का मानना है कि परिस्थितियां जिस तेजी से बदल रही हैं, उसका सीधा और करारा असर भारत की राजनीति पर पड़ेगा और जनता खुद इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी। वहीं इस बैठक के दौरान एक बेहद दिलचस्प और तीखी बहस भी देखने को मिली। बैठक में मौजूद कुछ नेताओं ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे राजनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए सार्वजनिक मंचों पर सीधे मुस्लिम शब्द बोलने की जगह अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल करें। लेकिन राहुल गांधी ने इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी बात बेबाकी से रखते हुए कहा कि...
"डरने की कोई जरूरत नहीं है! जिस भी वर्ग के साथ अन्याय हो रहा हो, कांग्रेस को उसके साथ खुलकर खड़ा होना चाहिए। चाहे वह हिंदू हो, दलित हो, सवर्ण हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो या बौद्ध-जैन...कांग्रेस का काम हर नागरिक के अधिकारों की आवाज बुलंद करना है।"
वहीं बैठक में उत्तर प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने भी पार्टी की रणनीति बदलने पर जोर दिया। मसूद ने साफ कहा कि पार्टी को अब यह विमर्श हर हाल में बदलना होगा कि मुस्लिम समाज केवल और केवल बीजेपी को हराने के लिए वोट करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस को मुस्लिम समाज के बीच जाकर यह संदेश देना चाहिए कि पार्टी ने उनके विकास और हक के लिए ऐतिहासिक काम किए हैं। समर्थन काम के आधार पर मांगा जाना चाहिए, ताकि बीजेपी को बहुसंख्यक ध्रुवीकरण की राजनीति करने का मौका ही न मिले। इसके साथ ही, कुछ नेताओं ने राहुल गांधी से यह शिकायत भी की कि अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर केवल वही मुखर रहते हैं, जबकि पार्टी के बाकी बड़े नेता इन संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से कतराते हैं। नेताओं ने मांग की कि बाकी नेताओं को भी राहुल गांधी की तरह ही निडर होकर बोलना चाहिए। वहीं इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि इसे केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रखा गया था। बल्कि देश के सभी प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए बड़े चेहरों को बुलाया गया था, जिसमें...
सिख समुदाय से गुरदीप सप्पल मौजूद रहे।
ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व हिबी ने किया।
बौद्ध समुदाय की तरफ से राजेंद्र पाल गौतम शामिल हुए।
जैन समुदाय से दिग्गज वकील और नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने हिस्सा लिया।
वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर आकर ऐसा पलटवार किया, जिसने विवाद को और भड़का दिया। गोयल ने राहुल गांधी पर राष्ट्रद्रोह जैसी मंशा रखने का आरोप लगाते हुए लिखा:
"राहुल गांधी का यह बयान देश के खिलाफ कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और भारत को अस्थिर करने का सपना देख रहे 'टूलकिट गैंग' की एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। जब राहुल गांधी एंड कंपनी ने देख लिया कि वे पीएम मोदी को देश की जनता के दिलों से नहीं हटा सकते और सीधी लोकतांत्रिक लड़ाई में भाजपा को हरा नहीं सकते, तो अब वे देश में हिंसा और अराजकता फैलाना चाहते हैं।"
पीयूष गोयल यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी को भारत से इतनी नफरत है कि वे देश का कुछ भी अच्छा होता देख नहीं सकते। राष्ट्र को बदनाम करना, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और विदेशी धरती पर जाकर भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी ताकतों से हस्तक्षेप की भीख मांगना, यही कांग्रेस की असली स्क्रिप्ट है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश की जनता समझदार है और 'INDI गठबंधन' की भारत में आग लगाने की यह साजिश कभी कामयाब नहीं होगी।
देखा जाए तो कांग्रेस की इस अल्पसंख्यक सलाहकार समिति की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष अब बैकफुट पर खेलने के मूड में बिल्कुल नहीं है। राहुल गांधी ने जहां सीधे पीएम मोदी की कुर्सी जाने की डेडलाइन तय करके एक बहुत बड़ा जुआ खेला है, वहीं बीजेपी ने इसे देश के खिलाफ विदेशी ताकतों का षड्यंत्र बताकर राष्ट्रवाद के मुद्दे को फिर हवा दे दी है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या राहुल गांधी के पास वाकई देश के बदलते आर्थिक हालातों का कोई ऐसा इनपुट है जिसके दम पर उन्होंने इतनी बड़ी भविष्यवाणी कर दी? या फिर यह केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरने और सुर्खियों में बने रहने का एक राजनीतिक स्टंट है? जवाब जो भी हो, लेकिन पीयूष गोयल और राहुल गांधी के बीच छिड़ी इस नई जंग ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में देश की संसद से लेकर सड़क तक, सत्ता और विपक्ष के बीच की यह लड़ाई और भी ज्यादा तीखी होने वाली है!

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