राहुल गांधी का प्रयागराज प्लान! छात्रों के मुद्दों से 2027 में BJP को घेरने की तैयारी?
अब हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश की सियासत के उस इलाके की...जहां से उठी राजनीतिक लहर अक्सर पूरे यूपी की सत्ता का रास्ता तय करती है। जी हां...बात पूर्वांचल की...और खास तौर पर प्रयागराज की...जहां बीते दिनों कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के बीच पहुंचकर ऐसा सियासी संदेश देने की कोशिश की है, जिसने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। राहुल गांधी प्रयागराज पहुंचे...हजारों छात्रों के बीच पहुंचे...'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में करीब 47 मिनट तक छात्रों से सीधा संवाद किया...मंच पर सात से ज्यादा छात्र-छात्राओं से बातचीत की...और शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। लेकिन सवाल है कि राहुल गांधी का यह कार्यक्रम सिर्फ छात्रों की समस्याओं तक सीमित था? या फिर इसके पीछे 2027 की चुनावी पटकथा भी लिखी जा रही है? क्योंकि प्रयागराज कोई सामान्य राजनीतिक जमीन नहीं है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रयागराज सीट पर जीत दर्ज की...उज्ज्वल रमण सिंह सांसद बने...और आसपास के इलाकों में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भी अपना असर दिखाया। अब 2027 से पहले राहुल गांधी उसी प्रयागराज में छात्रों के बीच पहुंचे हैं। देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...
दरअसल, उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल सिर्फ एक इलाका नहीं...बल्कि सत्ता की चाबी माना जाता है। यहां की सियासत का असर लखनऊ तक दिखाई देता है। और अब 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच प्रयागराज एक बार फिर राजनीतिक प्रयोगशाला बनता दिखाई दे रहा है। इस बार मुद्दा है...छात्र... युवा... शिक्षा... रोजगार और भर्ती परीक्षाएं। वहीं प्रयागराज के केपी ग्राउंड में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। यूपी के 23 जिलों से छात्रों को बुलाया गया था। मंच पर राहुल गांधी ने सात से ज्यादा छात्र-छात्राओं से सीधे बातचीत की। उनसे पूछा गया कि उनकी सबसे बड़ी परेशानी क्या है? और छात्रों ने भी अपनी परेशानियां खुलकर सामने रख दीं। किसी ने फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया...किसी ने सीटों में कटौती की बात कही...किसी ने छात्रसंघ चुनाव की मांग उठाई...तो किसी ने विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था और शिक्षकों की कमी का मुद्दा सामने रखा।
जाहिर है उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि परीक्षा की तैयारी करो...फीस भरो...सालों मेहनत करो...और फिर पेपर लीक की खबर आ जाए...परीक्षा रद्द हो जाए...या मामला अदालत में चला जाए। इसी मुद्दे को राहुल गांधी ने अपने भाषण में राजनीतिक रंग दिया। करीब 47 मिनट तक छात्रों के बीच बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम ने युवाओं को एक तरह के चक्रव्यूह में फंसा दिया है। उन्होंने युवाओं की बेरोजगारी और स्थायी रोजगार की कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि आज हजार युवाओं में केवल करीब 12 युवाओं को स्थायी नौकरी मिल रही है। अब राहुल गांधी के इस बयान को सिर्फ भाषण मानें...या फिर 2027 की चुनावी रणनीति? यही सबसे बड़ा सवाल है। क्योंकि राहुल गांधी का प्रयागराज दौरा ऐसे वक्त में हुआ है...जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। और कांग्रेस के लिए प्रयागराज का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है।
2024 के लोकसभा चुनाव में प्रयागराज सीट कांग्रेस के खाते में गई। उज्ज्वल रमण सिंह ने यहां जीत दर्ज की। आसपास के इलाकों में भी सपा-कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन पहले की तुलना में बेहतर रहा। ऐसे में अब कांग्रेस की कोशिश युवा वोट को अपने पक्ष में करना है। और इसके लिए राहुल गांधी लगातार छात्रों और युवाओं के बीच पहुंचने की रणनीति पर जोर देते दिखाई दे रहे हैं। कोटा...देहरादून...और अब प्रयागराज। यानी प्रतियोगी छात्रों के बड़े केंद्रों में जाकर शिक्षा, रोजगार और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे उठाना। कांग्रेस की रणनीति साफ दिखाई देती है...क्योंकि जातीय समीकरण अपनी जगह है...लेकिन नौकरी और शिक्षा का सवाल हर जाति के युवा को जोड़ सकता है। यही वजह है कि प्रयागराज का यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है।
अब आइए जरा पूर्वांचल के समीकरण को समझते हैं। आपको बता दें प्रयागराज में सिर्फ प्रयागराज के छात्र नहीं पढ़ते।
प्रतापगढ़ से लेकर कौशांबी...जौनपुर से भदोही...वाराणसी से मिर्जापुर...और आजमगढ़ तक...पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में युवा प्रयागराज आते हैं। कोचिंग करते हैं...विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं...प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं...और फिर अपने गांव-कस्बों में वापस लौटते हैं। यानी प्रयागराज में उठी एक आवाज...सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं रहती। अगर कोई छात्र अपने घर जाकर अपने परिवार और गांव के दूसरे युवाओं से यही बात करता है कि भर्ती परीक्षा में क्या हुआ...फीस कितनी बढ़ी...नौकरी कितनी मिली...पेपर लीक क्यों हुआ...तो यह चर्चा धीरे-धीरे राजनीतिक बहस में बदल सकती है। और यही 2027 के चुनाव में बड़ा फैक्टर बन सकता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को लगता है कि अगर युवा वर्ग उनके साथ मजबूती से जुड़ता है...तो पूर्वांचल की कई विधानसभा सीटों के समीकरण बदल सकते हैं। खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र और नौकरी की तैयारी करने वाले युवा हैं।
लेकिन बीजेपी भी इस पूरी तस्वीर को नजरअंदाज नहीं कर सकती। जी हां सत्तारूढ़ बीजेपी का तर्क है कि प्रदेश सरकार ने लगातार पारदर्शी तरीके से सरकारी भर्तियां की हैं और पेपर लीक माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन राजनीति में सिर्फ सरकार का दावा काफी नहीं होता...जनता उस दावे को कितना मानती है...यही चुनाव तय करता है। वहीं अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या छात्र राजनीति 2027 में यूपी की सत्ता का रास्ता बदल सकती है? तो इसका जवाब अभी आसान नहीं है। क्योंकि चुनाव सिर्फ छात्रों के वोट से नहीं जीता जाता। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण...क्षेत्रीय समीकरण...महिला वोट...किसान...शहरी मतदाता...ग्रामीण वोट बैंक...संगठन...और सरकार का कामकाज...सबका अपना महत्व है। लेकिन एक बात तय है...युवा वोट को कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता। और अगर लाखों प्रतियोगी छात्रों के बीच बेरोजगारी...पेपर लीक...और परीक्षा की पारदर्शिता जैसे सवाल लगातार बने रहते हैं...तो ये मुद्दे चुनाव के दौरान बड़ा असर डाल सकते हैं।
देखा जाए तो प्रयागराज से उठी छात्रों की गूंज अब सिर्फ एक कार्यक्रम की आवाज नहीं रह गई है...यह 2027 की चुनावी राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत बनती दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और साफ संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस युवाओं के सवाल पर यूपी की राजनीति में अपनी जगह बनाना चाहती है।
अब गेंद बीजेपी के पाले में है। क्योंकि अगर विपक्ष युवाओं के सवाल को मुद्दा बना रहा है...तो सरकार को भी इन सवालों का जवाब देना होगा। भले ही 2027 का चुनाव अभी दूर है...लेकिन चुनावी लड़ाई के मुद्दे अभी से तैयार होने लगे हैं। और अगर प्रयागराज की आवाज पूर्वांचल के गांवों और कस्बों तक पहुंच गई...तो आने वाले वक्त में यह छात्रों की गूंज...सियासत की सबसे बड़ी गूंज भी बन सकती है।
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