अमित शाह जवाब देने को तैयार, फिर विपक्ष क्यों पीछे? संसद में बढ़ा सियासी घमासान
संसद का मानसून सत्र...सड़कों पर छात्रों का प्रदर्शन...दिल्ली पुलिस की कार्रवाई...और अब इस मुद्दे पर संसद के अंदर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं...सवाल कर रहे हैं कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत किसने दी? लेकिन अब सरकार ने कहा है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं...गृह मंत्री सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं...बस विपक्ष जवाब सुनने के वक्त सदन में मौजूद रहे और हंगामा न करे। लेकिन फिर सवाल उठता है कि जब विपक्ष खुद गृह मंत्री से जवाब मांग रहा है...सरकार चर्चा के लिए तैयार है...अमित शाह जवाब देने को तैयार हैं...तो फिर विपक्ष पीछे क्यों हट रहा है? एक तरफ जवाब चाहिए...दूसरी तरफ चर्चा के वक्त सदन में बैठने को तैयार नहीं? क्या विपक्ष सिर्फ सरकार पर आरोप लगाना चाहता है...या सच में गृह मंत्री का जवाब भी सुनना चाहता है? आज की इस खास रिपोर्ट में इसी पूरे सियासी घमासान को समझेंगे...
20 जून...दिल्ली...छात्रों का संसद मार्च...पुलिस की कार्रवाई...लाठीचार्ज के आरोप...और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल। उस दिन की तस्वीरें सामने आने के बाद से ही कांग्रेस और विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को गंभीर मुद्दा बताया और लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते रहे। राहुल गांधी का सवाल है कि...
छात्रों पर लाठीचार्ज क्यों हुआ?
पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी?
क्या गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी?
और अगर जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि अगर अमित शाह को इसकी जानकारी थी तो उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अगर जानकारी नहीं थी तो भी यह सवाल उठता है कि गृह मंत्रालय को इतनी बड़ी कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं थी। यानी कांग्रेस की तरफ से सीधा निशाना गृह मंत्री अमित शाह पर है। लेकिन...अब कहानी में ट्विस्ट यहीं से आता है। क्योंकि सरकार ने विपक्ष की मांग पर चर्चा के लिए हामी भर दी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कहा कि सरकार देशभर में छात्र आंदोलनों और उनसे जुड़ी गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। और सरकार का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए भी तैयार हैं। वहीं जेपी नड्डा ने भी विपक्ष पर हमला बोला और साफ किया कि अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन विपक्ष ही चर्चा से भाग रहा है।
यानी जिस जवाब की मांग विपक्ष इतने दिनों से कर रहा था...सरकार कह रही है...आइए...सदन में चर्चा करिए...गृह मंत्री जवाब देंगे। लेकिन अब विपक्ष की तरफ से सवाल उठ रहे हैं कि चर्चा का तरीका क्या होगा...क्या मुद्दे को सीमित किया जाएगा...और क्या विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका मिलेगा? यहीं से संसद का पूरा सियासी पारा चढ़ गया है।
अब आइए सरकार की तरफ से रखी गई बात को समझते हैं। दरअसल, किरेन रिजिजू का कहना है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है...लेकिन जब चर्चा हो...जब गृह मंत्री जवाब दें...तो विपक्ष को सदन में हंगामा नहीं करना चाहिए। गृह मंत्री को अपना जवाब पूरा करने देना चाहिए। और विपक्ष को जवाब के वक्त सदन से बाहर नहीं चले जाना चाहिए। सरकार का तर्क है कि अगर विपक्ष ने चर्चा की मांग की है...तो फिर जब चर्चा हो और सरकार जवाब दे...तो जवाब सुनना भी विपक्ष की जिम्मेदारी है।
आपको बता दें इसी रणनीति की झलक मंगलवार को NDA की 'मंगल मिलन' बैठक में भी दिखाई दी। संसद के मॉनसून सत्र के बीच NDA सांसदों की बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठक में पहुंचे। गृह मंत्री अमित शाह समेत NDA के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। और इस दौरान सांसदों ने हाथों में तिरंगा लहराया...पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में नजर आया।
लेकिन इस राजनीतिक तस्वीर के पीछे एक और तस्वीर तैयार की जा रही थी। NDA सांसदों के हाथों में पोस्टर लेकर संसद में पहुंचने की तैयारी थी। इन पोस्टरों के जरिए विपक्ष पर सीधा हमला करने की रणनीति बनाई गई। हालांकि कांग्रेस की तरफ से इस पूरे मामले पर अलग तस्वीर पेश की जा रही है। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार सामान्य विषय पर गृह मंत्री का भाषण नहीं चाहती...बल्कि वह छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाब चाहते हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दोनों को संसद में आकर इस मामले पर जवाब देना चाहिए। उनका सवाल है कि दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? राहुल गांधी ने इस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए और जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस इस मामले को सिर्फ पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं मान रही...बल्कि इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़ रही है।
कुल मिलाकर दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब सड़क से संसद तक पहुंच चुका है...एक तरफ कांग्रेस और राहुल गांधी हैं...जो लगातार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं...दूसरी तरफ सरकार है...जो कह रही है कि चर्चा करिए, गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं। अब देखना होगा कि संसद में अगली भिड़ंत किस मुद्दे पर होती है...
छात्रों के सवाल पर सरकार क्या जवाब देती है...और उस जवाब के सामने विपक्ष की अगली रणनीति क्या होती है।
फिलहाल दिल्ली से लेकर संसद तक...छात्रों का मुद्दा सियासत के केंद्र में है...
No Previous Comments found.