‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी पर केस खत्म कराने की कोशिश नाकाम, राहुल गांधी को HC से झटका

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल की ओर से दायर मानहानि शिकायत को खत्म करने की राहुल गांधी की मांग को खारिज कर दिया है। यह मामला मुंबई के गिरगांव स्थित मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित है।

जस्टिस एनआर बोरकर की पीठ ने सोमवार को मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द करना उचित नहीं है। हालांकि, अदालत ने राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

मामले की शुरुआत 2018 में राजस्थान में हुई एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी के भाषण से हुई थी। शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमाल का आरोप है कि रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया। इसी आधार पर उन्होंने 2019 में मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि की शिकायत दाखिल की थी।

अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। हालांकि, यह समन उन्हें जुलाई 2021 में प्राप्त हुआ। इसके बाद राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने और शिकायत को रद्द करने की मांग की।

सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से उनके वकीलों ने शिकायत को राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन बताया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आपराधिक मानहानि से जुड़े प्रावधानों के तहत शिकायतकर्ता को इस तरह की शिकायत दाखिल करने का वैधानिक अधिकार नहीं था। उन्होंने सीआरपीसी की धारा 199(2) और आईपीसी की धारा 499 का भी हवाला दिया।

वहीं, महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने अदालत में कहा कि हाईकोर्ट की ओर से आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की शक्ति का इस्तेमाल सीमित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, मामले में मौजूद आरोपों और सबूतों का मूल्यांकन ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान किया जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील रोहन महाडिक ने कहा कि उनके मुवक्किल ने शुरुआती स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना मामला स्थापित किया है और इसलिए कार्यवाही को इस चरण पर खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के एक मामले का भी संदर्भ दिया, जिसमें बीजेपी जैसी पंजीकृत राजनीतिक पार्टी को एक पहचान योग्य संस्था के तौर पर माना गया था। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी।

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