राहुल गांधी विदेश दौरे पर? BJP का तंज, संजय राउत की सत्ता परिवर्तन वाली भविष्यवाणी!

देश की राजनीति में इस वक्त एक तरफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर घमासान मचा हुआ है, दूसरी तरफ चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। विपक्षी नेता सड़कों पर उतर रहे हैं, मार्च निकाल रहे हैं और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसी सियासी माहौल के बीच राहुल गांधी के एक कथित विदेश दौरे ने राजनीति में नया बवाल खड़ा कर दिया है। जी हां देश में एक तरफ जहां वोटर लिस्ट के SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष सड़कों पर उतरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अचानक विदेश दौरे ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है! बीजेपी ने एक वीडियो जारी कर सीधा तंज कसा है कि राहुल गांधी झूठ फैलाकर एक बार फिर छुट्टियों पर निकल पड़े हैं। उधर, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि राहुल के लौटते ही देश में 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन हो जाएगा और अप्रैल के आखिरी हफ्ते में मोदी सरकार चली जाएगी! ऐसे में आइए जानते है...क्या है इस पूरी विदेशी यात्रा का सच, क्यों राहुल गांधी के हर दौरे पर इतना बड़ा बवाल मचता है, और बीजेपी तथा कांग्रेस के बीच छिड़ी इस आर-पार की जंग के क्या हैं सियासी मायने? 

कहते है राजनीति में कब कौन सा मुद्दा तूल पकड़ ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। ताजा मामला जुड़ा है लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से। हाल ही में गोवा में कांग्रेस की 'गोय राखोन यात्रा' में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ दो किलोमीटर पैदल चलने और दिल्ली में विजन IAS कोचिंग संस्थान के छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनने के बाद राहुल गांधी का एक फ्लाइट का वीडियो सामने आया, जिसके बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है।
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने 19 अक्टूबर को अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से एक फ्लाइट के अंदर का वीडियो शेयर करते हुए राहुल गांधी पर करारा प्रहार किया है। बीजेपी ने कैप्शन में लिखा....

‘झूठ फैलाते-थक गया हूं, कुछ दिन वियतनाम घूम आता हूं, किसी को क्या ही पता चलेगा!’ 

बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी से राजनीतिक दबाव और देश की जमीन पर संघर्ष बर्दाश्त नहीं होता, इसलिए वे मौका मिलते ही विदेश की सैर पर निकल जाते हैं। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह और नेता शाजिया इल्मी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी 'लीडर ऑफ पार्टीइंग एंड टूरिज्म' हैं। वे दो हफ्ते भी लगातार काम नहीं कर पाते और चुनाव या संघर्ष के समय अपनी छुट्टियों पर विदेश चले जाते हैं। बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी के विदेश जाने का यह कोई पहला मौका नहीं है, बल्कि इससे पहले भी चाहे बिहार चुनाव हो, होली का मौका हो या संसद के सत्र, वे अक्सर ऐसे समय गायब रहते हैं। वहीं इस पूरे विवाद में तब और ज्यादा तड़का लग गया जब शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने खुलकर राहुल गांधी का समर्थन किया और एक बेहद सनसनीखेज भविष्यवाणी कर डाली। संजय राउत ने दावा किया कि राहुल गांधी वियतनाम से जैसे ही भारत लौटेंगे, देश में 'रिजीम चेंज' यानि सत्ता परिवर्तन का बड़ा खेल शुरू हो जाएगा। राउत ने यहां तक कह दिया कि अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार चली जाएगी, इसे कोई रोक नहीं सकता। 

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के हमलों का जवाब देने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत से मैदान में उतर आई है। कांग्रेस नेताओं और गठबंधन के सहयोगियों ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी के निजी दौरों को बेवजह तूल दिया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी कहां जाते हैं, किससे मिलते हैं और अपने निजी समय का इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह मुद्दा बनाना महज राजनीतिक निशाना साधने की कोशिश है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी बीजेपी पर पलटवार किया। उन्होंने प्रधानमंत्री की यात्राओं का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि जब दूसरे नेता विदेश जाते हैं, तो केवल राहुल गांधी के दौरे को ही विवाद का विषय क्यों बनाया जा रहा है? हालांकि इस विवाद के बीच 21 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से एक और जानकारी साझा की गई। पार्टी ने तस्वीरें जारी करते हुए बताया कि राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नई दिल्ली में ‘विजन IAS’ कोचिंग संस्थान के छात्रों से मुलाकात की। कांग्रेस के मुताबिक, छात्रों ने संस्थान में पढ़ाई की गुणवत्ता, मेंटरशिप और स्टडी मटेरियल में गिरावट को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। छात्रों ने फीस रिफंड की मांग पर प्रबंधन की ओर से जवाब नहीं मिलने की बात भी कही। इस मुलाकात की जानकारी सामने आने के बाद राहुल गांधी के वियतनाम जाने के दावे को लेकर एक अहम सवाल खड़ा होता है। एक तरफ बीजेपी के सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि राहुल गांधी वियतनाम गए हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में छात्रों से उनकी मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। आपको बता दें यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब देश में मतदाता सूची के SIR और कथित वोट चोरी को लेकर सियासत उफान पर है। राहुल गांधी ने पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दिल्ली में सड़कों पर मार्च निकाला था और सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी, जिसमें रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति से वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों का ऑडिट कराने की मांग की गई थी। ऐसे तीखे तेवर दिखाने के ठीक बाद राहुल का विदेश जाना बीजेपी को एक बड़ा हथियार दे बैठा है।

आपको बता दें राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर विवाद कोई पहली बार नहीं उठा है। इससे पहले भी कई मौकों पर बीजेपी ने उनकी यात्राओं के समय, अवधि और राजनीतिक गतिविधियों में उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल किए हैं।

फरवरी से अप्रैल 2015: बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी करीब 56 दिनों की लंबी छुट्टी पर चले गए थे, जिसकी भारी राजनीतिक कीमत पार्टी को चुकानी पड़ी थी।

सितंबर 2015: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी अमेरिका के एस्पेन में एक सम्मेलन में शामिल होने गए थे। 

दिसंबर 2024 और मार्च 2025: पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के निधन के शोक के वक्त और होली के दौरान भी उनके वियतनाम दौरे को लेकर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

दिसंबर 2025: संसद के शीतकालीन सत्र के बीच उनके जर्मनी दौरे पर भी बीजेपी ने संसद से भागने के आरोप लगाए थे।

मार्च 2026 में लोकसभा में खुद गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़े रखते हुए कहा था कि 2015 से 2019 के बीच राहुल गांधी ने कई बार बिना एसपीजी को सूचित किए विदेश यात्राएं की थीं और संसद की बहसों से दूरी बनाए रखी थी।

इन घटनाओं से साफ है कि राहुल गांधी की विदेश यात्राएं लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रही हैं। हालांकि इतनी यात्राओं और आलोचनाओं के बाद अब ऐसा लगता है कि जैसे राहुल गांधी अब इन आलोचनाओं की परवाह किए बिना अपनी शर्तों पर राजनीति करते हैं। चाहे पार्टी के अंदर की आपत्तियां हों या बाहर की बयानबाजी, वे अपनी कार्यशैली से यह संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी को उन्हें उनके पूरे अंदाज में स्वीकार करना होगा।

आपको बता दें राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर एक पुराना आंकड़ा भी अक्सर राजनीतिक बहस में सामने आता रहा है। पहले के राजनीतिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 2015 से 2019 के बीच राहुल गांधी ने 247 विदेश यात्राएं की थीं, जिनमें कुछ यात्राओं की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को पहले से नहीं दी गई थी। राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने वालों का तर्क रहा है कि कांग्रेस जब किसी बड़े राजनीतिक अभियान, चुनाव या संगठनात्मक चुनौती का सामना कर रही होती है, तब उनके देश से बाहर रहने को लेकर पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े होते हैं। पहले भी ऐसे मौके आए, जब कांग्रेस के कार्यक्रमों और राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चा हुई। पार्टी के स्थापना दिवस के एक पुराने कार्यक्रम के दौरान भी राहुल गांधी के विदेश जाने को लेकर विवाद हुआ था। उस समय कांग्रेस की ओर से उनकी यात्रा का पारिवारिक कारण बताया गया था, जबकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक जिम्मेदारी से जोड़कर निशाना साधा था। इसी तरह नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौर में राहुल गांधी की दक्षिण कोरिया यात्रा को लेकर भी सवाल उठे थे। कांग्रेस ने उस यात्रा को पहले से तय बताया था।

तो कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी के कथित वियतनाम दौरे ने एक बार फिर देश की राजनीति में विदेश यात्राओं को लेकर पुरानी बहस को हवा दे दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक बीजेपी को घेरने का दावा कर रही है, वहीं राहुल गांधी के इस अचानक वियतनाम दौरे ने विपक्षी खेमे को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है। बीजेपी इसे उनकी 'राजनीतिक गैर-जिम्मेदारी' और 'छुट्टी मनाने की आदत' बता रही है, तो वहीं कांग्रेस इसे उनका व्यक्तिगत अधिकार बताकर बचाव कर रही है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि वियतनाम से लौटने के बाद राहुल गांधी इस सियासी संग्राम को कौन सा नया मोड़ देते हैं। 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.