कोर्ट में राहुल गांधी ने दी सफाई, कार्तिकेय चौहान ने वापस लिया केस
वो मुकदमा जो पिछले 8 साल से कोर्ट की फाइलों में सुलग रहा था, वो विवाद जिसने मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में भूचाल ला दिया था...उस पर अब एक ऐसा फुलस्टॉप लगा है, जिसने सबको हैरान कर दिया है! जी हां, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के फायरब्रांड नेता राहुल गांधी ने आखिरकार कोर्ट में लिखित रूप से घुटने टेकते हुए खेद जता दिया है। केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान पर दिए गए जिस बयान को लेकर राहुल गांधी चौतरफा घिरे थे, उसी मामले में कोर्ट के अंदर राहुल गांधी को कहना पड़ा कि...गलती हो गई! वो बयान कार्तिकेय के लिए नहीं था, बस कन्फ्यूजन हो गया था।' वहीं उधर, कार्तिकेय चौहान ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए कह दिया कि...'कोई बात नहीं, सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए, तो उसे भूला नहीं कहते।' दोनों के बीच ऐसी नरमी आई कि 8 साल पुराना मानहानि का यह महा-मुकदमा हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो गया! आइए आपको बताते हैं इस मामले के पीछे की पूरी कहानी।
दरअसल, यह पूरी कहानी शुरू होती है साल 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से। चुनावी पारा सातवें आसमान पर था और झाबुआ में कांग्रेस की एक बड़ी रैली चल रही थी। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंच पर आए और जोश-जोश में उन्होंने सीधे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम ले लिया। राहुल गांधी ने आरोप जड़ दिया कि कार्तिकेय का नाम मशहूर 'पनामा पेपर्स लीक' घोटाले में शामिल है।
वहीं अब चुनाव के वक्त ऐसा गंभीर आरोप लगे, तो हंगामा होना ही था। यह बात कार्तिकेय चौहान को इतनी चुभ गई कि उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर सीधा हमला माना। कार्तिकेय ने बिना वक्त गंवाए भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का क्रिमिनल केस ठोक दिया। कार्तिकेय का साफ कहना था कि इस झूठे बयान से समाज में उनकी और उनके परिवार की छवि को गहरी ठेस पहुंची है। वहीं साल दर साल यह केस खिंचता रहा। कानूनी दांव-पेंच चलते रहे। आखिरकार, दिसंबर 2024 में भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी कर दिया और आदेश दिया कि 25 जून को उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने पेश होना होगा। समन मिलते ही कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई। 25 जून की इस व्यक्तिगत पेशी से बचने के लिए राहुल गांधी के वकीलों ने आनन-फानन में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया।
हाई कोर्ट के जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के सामने इस मामले की अर्जेंट सुनवाई शुरू हुई। मंगलवार और बुधवार को कोर्ट में जबरदस्त बहस हुई। राहुल गांधी के वकीलों ने निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड हाई कोर्ट के सामने रखा। राहुल गांधी की तरफ से कोर्ट में एक लिखित आवेदन पेश किया गया, जिसने पूरे केस का रुख ही पलट कर रख दिया! दरअसल, राहुल गांधी की तरफ से जो लिखित दस्तावेज कोर्ट में दिए गए, उसमें उन्होंने अपने बयान पर गहरा खेद जताया। राहुल गांधी के वकील ने कोर्ट के सामने साफ-साफ शब्दों में कहा कि उनका वह बयान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार या उनके बेटे कार्तिकेय के खिलाफ था ही नहीं। यह सिर्फ और सिर्फ एक गलतफहमी का नतीजा था।
वहीं राहुल गांधी की तरफ से दलील दी गई कि असल में उनका निशाना छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके बेटे अभिषेक सिंह थे! भाषण के फ्लो में गलती से और कन्फ्यूजन की वजह से कार्तिकेय चौहान का नाम उनकी जुबान पर आ गया था। कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि उन्हें जैसे ही अपनी इस गलती का अहसास हुआ था, उन्होंने अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से इस पर स्थिति साफ कर दी थी। वहीं इस पूरे मामले में ट्विस्ट तब आया जब कार्तिकेय चौहान ने कोर्ट में बड़ा दिल दिखाया। राहुल गांधी द्वारा लिखित रूप से गलती स्वीकार करने और खेद जताने के बाद, कार्तिकेय ने उनकी इस सफाई को मंजूर कर लिया और केस को आगे न बढ़ाने यानी आपसी सहमति से खत्म करने की रजामंदी दे दी।
जहां कोर्ट ने दोनों पक्षों की आपसी सहमति को देखते हुए राहुल गांधी के खिलाफ लंबित इस मानहानि के मुकदमे को हमेशा के लिए खारिज कर दिया। आपको बता दें सिर्फ हाई कोर्ट ही नहीं, बल्कि भोपाल की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में जो केस पेंडिंग था, उसे भी पूरी तरह से बंद करने के आदेश दे दिए गए। यानी कानूनी मोर्चे पर राहुल गांधी को बहुत बड़ी राहत मिल गई और आगे होने वाली व्यक्तिगत पेशी का टेंशन भी खत्म हो गया। लेकिन, कानून की अदालत से राहत मिलते ही राजनीति की अदालत में राहुल गांधी फिर घिर गए! जी हां बीजेपी के आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राहुल गांधी को आड़े हाथों ले लिया। मालवीय ने तंज कसते हुए लिखा:
"राहुल गांधी को शायद 'माफी मांगना' अपना मिडिल नेम बना लेना चाहिए। उन्होंने कितनी बार माफी मांगी है, खेद व्यक्त किया है या अपने गैर-जिम्मेदाराना बयानों को वापस लिया है, इसकी गिनती करना मुश्किल है।"
देखा जाए तो राजनीति का दस्तूर यही है! चुनाव के मैदान में जब नेता माइक थामते हैं, तो जोश में होश ऐसे खोते हैं कि छत्तीसगढ़ के नेता का नाम मध्य प्रदेश के नेता के बेटे से बदल जाता है। लेकिन कानून की चौखट पर जब डंडा चलता है, तब जाकर याद आता है कि गलती हो गई थी! बहरहाल, तपते हुए सियासी माहौल में दोनों पक्षों की आपसी सहमति ने इस 8 साल पुराने विवाद की आग को तो शांत कर दिया है। राहुल गांधी को कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई है, लेकिन बीजेपी के हाथों में कांग्रेस को घेरने का एक और बड़ा मौका आ गया है। अब देखना यह है कि इस सियासी खेल पर आगे क्या वार-पलटवार होता है!
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