NEET से परिसीमन तक! कैसे राहुल गांधी ने सरकार का गेम पलट दिया?

राजनीति में जो टीवी स्क्रीन पर दिखता है, हमेशा कहानी वहीं खत्म नहीं होती! NEET पेपर लीक मामले के बाद दिल्ली की सड़कों से लेकर संसद के बंद कमरों तक जो कुछ भी हुआ, वह एक ऐसी अनदेखी सियासी स्क्रिप्ट का जीता-जागता सबूत है, जिसने सरकार को चारों खाने चित कर दिया है. एक तरफ सड़कों पर लाखों छात्रों का उग्र बवंडर था, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और राहुल गांधी का फ्रंट-फुट अटैक! लेकिन इस पूरे सियासी ड्रामे के पीछे एक ऐसा गुप्त और सोची-समझी रणनीति काम कर रही थी, जिसने सरकार के उस ड्रीम प्रोजेक्ट को फिलहाल ठंडे बस्ते में धकेल दिया है, जिसके लिए सत्ता पक्ष पिछले तीन महीनों से बहुमत का गणित जुटाने में जी-तोड़ मेहनत कर रहा था! देखिए...

आपको बता दें जैसे ही NEET मामले का धमाका हुआ, राहुल गांधी ने बिना एक पल गंवाए सीधा मोर्चा संभाल लिया. उनके सोशल मीडिया हैंडल से एक के बाद एक तीखे तीरों की बौछार शुरू हो गई. राहुल ने NEET को सिर्फ एक परीक्षा की नाकामी नहीं, बल्कि देश के पूरे एजुकेशन सिस्टम को कैप्चर करने की साजिश करार दिया. आंकड़ों के तीर चलाकर उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों को घेरा और केंद्र सरकार को पेपर लीक की फैक्ट्री तक कह डाला. लेकिन बात सिर्फ पोस्ट तक सीमित नहीं रही! राहुल गांधी ने देश के अलग-अलग कोनों में जाकर पीड़ित छात्रों और उनके परिजनों से सीधी मुलाकातें कीं. मकसद साफ था...मध्यम वर्गीय परिवारों और युवाओं के आक्रोश को सीधे केंद्र सरकार की नीयत और विश्वसनीयता से जोड़ देना. वहीं कांग्रेस के एक महीने के शांत रुख के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म जन्मा, जिसने आंदोलन में नए प्राण फूंक दिए, और वो था...CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी! 
अमेरिका के बोस्टन शहर से पढ़ाई कर लौटे अभिजीत दिपके ने व्यंग्य और छात्रों के तीखे गुस्से से उपजे इस नाम के बैनर तले नीट धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल दिया. भीड़ जुटने लगी, लेकिन आंदोलन को असली ताकत तब मिली जब लद्दाख के मुद्दे पर NSA झेल चुके सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक मंच पर पहुंचे और आमरण अनशन शुरू कर दिया! मॉनसून सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले जंतर-मंतर का माहौल उफान पर था. फिर हुआ दिल्ली पुलिस का एक्शन! संसद सत्र के पहले ही दिन जंतर-मंतर की सड़कों पर रोते-बिलखते छात्र, बिखरी किताबें, लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस के वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गए. जनता के बीच सीधा मैसेज गया कि सरकार धांधली सुधारने के बजाय देश के भविष्य पर लाठियां भांज रही है!

वहीं दूसरी तरफ संसद का मॉनसून सत्र शुरू होते ही कांग्रेस ने अपनी रणनीति का दूसरा और सबसे घातक चरण लागू किया. कहा जाता है कि इस पूरे ड्रामे की पटकथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर तैयार हुई थी. राहुल गांधी अचानक कांग्रेस सांसदों और इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ सीधे प्रधानमंत्री आवास पर धरना देने पहुंच गए! लाइव टीवी कैमरों के सामने दिल्ली पुलिस ने जब राहुल गांधी को घसीटकर हिरासत में लिया, तो एक ऐसी तस्वीर निकलकर आई जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जी हां राहुल गांधी की हमेशा चमचमाती रहने वाली सफेद टी-शर्ट पुलिस की झूमाझटकी में मैली हो चुकी थी! कश्मकश में उनके पैरों से एक जूता तक गायब हो चुका था! 

इस एक वीडियो ने पूरे NEET आंदोलन का नैरेटिव राहुल गांधी के पक्ष में मोड़ दिया. संदेश बहुत गहरा गया कि देश के बच्चों के हक के लिए विपक्ष का सबसे बड़ा नेता पुलिस की लाठियों और घसीटे जाने से भी नहीं डरता! वहीं इसके बाद सरकार नैतिक रूप से पूरी तरह बैकफुट पर आ गई. संसद के अंदर कांग्रेस ने एक बेहद सधा हुआ और तीखा दांव खेला. उन्होंने बाकी प्रदर्शनकारियों की तरह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी सबसे मुख्य और एक-मात्र मांग बना लिया.

रणनीति साफ थी कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा, तब तक संसद में कोई चर्चा या कामकाज नहीं होने दिया जाएगा! यानी 'नो इस्तीफा, नो हाउस'. अब तक कांग्रेस पर रणनीति में बिखराव के आरोप लगते थे, लेकिन NEET के मुद्दे पर पूरी कांग्रेस और पूरा विपक्ष राहुल गांधी के पीछे चट्टान की तरह एकजुट नजर आया. वहीं अब आते हैं इस पूरी कहानी के सबसे बड़े और अनदेखे 'क्लाइमेक्स' पर! मॉनसून सत्र से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में यह खबर बेहद गर्म थी कि मोदी सरकार इस सत्र में परिसीमन विधेयक पेश करने जा रही है.

इसके लिए पिछले तीन महीनों से अलग-अलग राज्यों और पार्टियों में तोड़-फोड़ करके दो-तिहाई बहुमत जुटाने का जी-तोड़ प्रयास किया जा रहा था. लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस के इस NEET चक्रव्यूह ने सरकार के सारे गणित की धज्जियां उड़ा दीं! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और NEET धांधली पर अड़े विपक्ष ने संसद को पूरी तरह ठप्प कर दिया. एक तरफ सड़कों पर छात्रों का भारी गुस्सा था और दूसरी तरफ संसद में हाहाकार! ऐसे विस्फोटक माहौल में परिसीमन जैसे विवादित बिल को संसद में पेश करना सरकार के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक जोखिम बन गया.

देखा जाए तो NEET के मुद्दे को सड़क से उठाकर सीधे प्रधानमंत्री आवास के दरवाजे तक ले जाना, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को ढाल बनाना और सरकार के सबसे बड़े परिसीमन बिल के रास्ते में अड़ंगा लगा देना, कांग्रेस का यह सियासी दांव फिलहाल 100% कामयाब साबित हुआ है! सड़क पर मैली टी-शर्ट और गायब जूते वाली राहुल गांधी की उस एक तस्वीर ने न केवल देश के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के गुस्से को आवाज दी, बल्कि पर्दे के पीछे चल रहे परिसीमन के खेल को भी फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया. सरकार लगातार सफाई देने पर मजबूर है, और विपक्ष ने यह साबित कर दिया है कि अगर रणनीति सही हो, तो सड़कों का आक्रोश संसद के बड़े से बड़े मास्टरप्लान को रोक सकता है! 

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