UP फतह से गिरेगा दिल्ली का सिंहासन? राहुल-अखिलेश के इस दावे से राजनीति में मचा महा-भूचाल!

दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है....ये कहावत तो आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मिलकर इस बार दिल्ली का सिंहासन हिलाने की एक ऐसी खौफनाक भविष्यवाणी कर दी है, जिसने राजनीति में भूचाल ला दिया है। राहुल गांधी का दावा है कि एक साल के भीतर मोदी सरकार गिर जाएगी और अखिलेश यादव ने इस पर सुर मिलाते हुए हुंकार भरी है कि यूपी में सपा की सरकार बनते ही दिल्ली की सरकार धड़ाम से गिर जाएगी! ऐसे में सवाल है कि क्या वाकई बैसाखियों पर टिकी मोदी सरकार के दिन अब गिनती के बचे हैं, या फिर यह सिर्फ विपक्ष की हताशा का गुब्बारा है? आइए आपको बताते हैं इस भविष्यवाणी के पीछे की वो इनसाइड स्टोरी...

दरअसल, इस पूरे सियासी महासंग्राम की चिंगारी तब भड़की जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की एक बंद कमरे में हुई बेहद महत्वपूर्ण बैठक में एक चौंकाने वाला दावा कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब ज़्यादा समय तक पीएम की कुर्सी पर टिक नहीं पाएंगे! राहुल गांधी ने अपनी बात को पुरजोर तरीके से रखते हुए यहाँ तक कह दिया, "मेरी भविष्यवाणी कभी गलत नहीं होती! देश में बहुत जल्द एक ऐसा भयानक आर्थिक संकट आने जा रहा है, जिससे यह सरकार घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगी। बीजेपी की नफरत और धर्म की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। इस भयंकर चौतरफा दबाव को पीएम मोदी संभाल नहीं पाएंगे। भले ही केंद्र में बीजेपी की सरकार बनी रहे, लेकिन नरेंद्र मोदी साल भर से ज़्यादा समय तक प्रधानमंत्री पद पर नहीं रहने वाले! राहुल के इस दावे ने राजनीतिक पंडितों से लेकर आम जनता तक सबको हैरान कर दिया है। 

वहीं राहुल गांधी के इस बयान ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को एक ऐसा सियासी हथियार दे दिया है, जिससे वे बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी द्वारा यूपी में सपा सरकार बनने का जिक्र करते ही अखिलेश यादव का सीना चौड़ा हो गया है और उन्होंने तुरंत इस मौके को लपकते हुए इस बयान का खुला समर्थन कर दिया। अखिलेश यादव ने राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश की राजनीति ही हमेशा देश की राजनीति का रुख और दिशा तय करती है। अगर यूपी में सरकार बदलती है, तो दिल्ली की सत्ता का संतुलन भी ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा। जैसे ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में आएगी, दिल्ली की मोदी सरकार अपने आप गिर जाएगी! 

आपको बता दें अखिलेश भली-भांति जानते हैं कि अगर मुस्लिम वोटों का थोड़ा सा भी बिखराव बहुजन समाज पार्टी या असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की तरफ हुआ, तो सपा को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए, वे खुद को बीजेपी का इकलौता सर्वश्रेष्ठ विकल्प साबित करके मुस्लिम मतदाताओं को पूरी तरह अपने पाले में एकजुट रखना चाहते हैं। भले ही बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का था, लेकिन अखिलेश इसी बयान का इस्तेमाल कांग्रेस के ही खिलाफ दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। वे आगामी चुनावों में इंडिया गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को बैकफुट पर धकेलना चाहते हैं। वे कांग्रेस को यह मानने के लिए मजबूर कर रहे हैं कि यूपी की कमान सिर्फ और सिर्फ समाजवादी पार्टी के हाथ में ही रहेगी। वहीं आंकड़ों के लिहाज से देखें तो उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से अकेले 80 सीटें इसी सूबे से आती हैं। 

भारत के इतिहास में दोनों सदनों में सबसे ज्यादा सीटों वाला यह राज्य हमेशा से देश की सत्ता की चाबी रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष को मिली अप्रत्याशित सफलता ने समाजवादी पार्टी के भीतर एक नए आत्मविश्वास का संचार किया है। यही वजह है कि अखिलेश अब खुद को एक क्षेत्रीय नेता से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी को चुनौती देने वाले मुख्य रणनीतिकार के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव के इन दावों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक और करारा पलटवार किया है। बीजेपी ने राहुल गांधी के बयानों को पूरी तरह से हवा-हवाई और चुनावी हार से उपजी राजनीतिक हताशा का नतीजा बताया है। वहीं अगर मौजूदा राजनीतिक हकीकत का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो राहुल गांधी का सरकार गिरने का यह दावा जमीन से ज्यादा केवल एक राजनीतिक शिगूफा नजर आता है। इसकी कई बड़ी वजहें हैं, जैसे....

बीजेपी की बंपर वापसी

2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही बीजेपी को 240 सीटें मिली थीं और सरकार नीतीश कुमार व चंद्रबाबू नायडू के सहयोग से बनी थी, लेकिन पिछले दो सालों में राजनीतिक हवा पूरी तरह बदल चुकी है। बीजेपी-एनडीए ने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में जबरदस्त और ऐतिहासिक जीत दर्ज करके सत्ता पर अपनी पकड़ को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर लिया है।

इंडिया गठबंधन का बिखराव

दरअसल, विपक्षी खेमे में आज भारी फूट देखने को मिल रही है। हालांकि विपक्ष ने झारखंड, जम्मू-कश्मीर, केरल और तमिलनाडु में सरकारें बनाई हैं और संसद में परिसीमन व महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर एकजुटता दिखाई थी, लेकिन अब उनका कुनबा बिखर रहा है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी से कांग्रेस के हाथ मिलाने के बाद DMK गठबंधन से लगभग बाहर हो चुकी है। आम आदमी पार्टी पहले ही कांग्रेस से दूरी बना चुकी है, और पश्चिम बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी अपने सांसदों को एकजुट रखने की भारी चुनौती है।

मुद्दों की हवा निकली

वहीं विपक्ष ने नीट पेपर लीक और छात्रों की नाराजगी को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए परीक्षाएं रद्द कर दीं और नए सिरे से पारदर्शी व्यवस्था लागू की, जिससे विपक्ष के हाथ से यह मुद्दा भी लगभग निकल चुका है।

ऐसे में कहानी बिल्कुल साफ है! राहुल गांधी की एक साल में सरकार गिरने की भविष्यवाणी और उस पर अखिलेश यादव का यूपी से दिल्ली फतह करने का महा-दांव फिलहाल तो वास्तविकता से ज्यादा एक राजनीतिक कल्पना नजर आता है। एनडीए सरकार संख्याबल के लिहाज से पूरी तरह स्थिर है और राज्यों के चुनावी नतीजों ने मोदी के नेतृत्व पर फिर से मुहर लगाई है। लेकिन राजनीति में दांव-पेंच और बयानों के तीर कब हवा का रुख बदल दें, यह कोई नहीं जानता। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव का यह पीडीए कार्ड और राहुल गांधी का यह आर्थिक संकट वाला दावा सच में दिल्ली के सिंहासन को हिला पाता है, या फिर राष्ट्रवाद और विकास के रथ पर सवार बीजेपी विपक्ष के इस चक्रव्यूह को एक बार फिर से तोड़ देगी! 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.