INDIA गठबंधन में दरार के संकेत? मीटिंग में राहुल गांधी पर बरसे लेफ्ट नेता, उठे एकता और नेतृत्व पर सवाल
नई दिल्ली में विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की हालिया बैठक में उस समय असहज स्थिति बन गई जब वामपंथी दलों के नेताओं ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के बयान पर खुलकर आपत्ति जता दी। यह बैठक मूल रूप से संसद सत्र की रणनीति तय करने और केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त विपक्षी रुख बनाने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन चर्चा का केंद्र अचानक कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के बीच बढ़ते मतभेद बन गए। वामपंथी सांसदों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सहयोगी दल एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाते रहेंगे तो गठबंधन की विश्वसनीयता कमजोर होगी और जनता के सामने विपक्ष की एकता पर सवाल उठेंगे।
दरअसल विवाद की जड़ केरल की राजनीति से जुड़ी है। हाल ही में केरल दौरे के दौरान राहुल गांधी ने वाम मोर्चे और भाजपा के बीच कथित संबंधों का आरोप लगाते हुए वाम दलों पर तीखी टिप्पणी की थी और एक बयान में उन्होंने वाम दलों को “सीजेपी” कह दिया, जिसे लेफ्ट नेताओं ने अपमानजनक बताया। इस बयान पर CPI(M) और CPI के नेताओं ने INDIA ब्लॉक की बैठक में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि राज्यों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को मजबूत रखने के लिए ऐसी भाषा से बचना जरूरी है।
बैठक के दौरान वामपंथी सांसदों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अगर सहयोगी दल ही एक-दूसरे को भाजपा की बी-टीम कहने लगेंगे तो फिर गठबंधन कैसे चलेगा?” इस पर कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी सफाई दी और कहा कि राहुल गांधी के बयान का संदर्भ राज्य की राजनीति से जुड़ा था, न कि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन से। सूत्रों के मुताबिक कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने भी बीच-बचाव करते हुए कहा कि बैठक का उद्देश्य संसद की रणनीति तय करना है, इसलिए व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर लंबी बहस करने से बचना चाहिए।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विपक्षी दलों का यह महागठबंधन लंबे समय तक एकजुट रह पाएगा। पिछले कुछ महीनों में भी गठबंधन के भीतर नेतृत्व, सीट शेयरिंग और राज्य स्तर की राजनीति को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग विचारधाराओं और क्षेत्रीय हितों वाले दलों को एक मंच पर बनाए रखना आसान नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो INDIA गठबंधन का गठन मुख्य रूप से भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाने के लिए किया गया था। कई राज्यों में विपक्षी दल मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर विभिन्न दलों के बीच लगातार बातचीत हो रही है ताकि चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके।
इसके अलावा संसद के अंदर और बाहर भी विपक्ष कई मुद्दों पर संयुक्त विरोध दर्ज कराने की योजना बना रहा है। चुनावी प्रक्रिया, बेरोजगारी, महंगाई और संवैधानिक संस्थाओं के मुद्दे विपक्ष के साझा एजेंडे में शामिल हैं। पहले भी INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर संयुक्त आंदोलन की घोषणा की थी।
लेकिन ताजा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि गठबंधन की सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि आपसी समन्वय की कमी भी हो सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विपक्ष को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत विकल्प के रूप में उभरना है तो सहयोगी दलों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचना होगा और साझा रणनीति पर अधिक ध्यान देना होगा।
फिलहाल INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मतभेदों को बड़ा मुद्दा न बनाने की कोशिश की है और संकेत दिया है कि संसद सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को घेरने के लिए एकजुट रहेगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि आने वाले चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व और समन्वय की परीक्षा और कठिन होने वाली है।

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