अगर नेहरू जीवित होते, तो कांशीराम...राहुल गांधी ने किया दावा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो बहुजन नेता कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। यह टिप्पणी उन्होंने कांशीराम की जयंती के मौके पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। राहुल गांधी ने कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन वंचित समुदायों के लिए समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित कर दिया।
 
कांग्रेस की विफलता और कांशीराम का अलग रास्ता
 
कांग्रेस नेता ने स्वीकार किया कि अतीत में कांग्रेस अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाने में विफल रही, जिससे कांशीराम जैसे नेताओं को अलग राजनीतिक रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उस समय कांग्रेस प्रभावी ढंग से काम करती, तो कांशीराम को अलग संघर्ष करने की जरूरत नहीं पड़ती। राहुल गांधी ने कहा कि नेहरू यह सुनिश्चित करते कि कांशीराम मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचते।
 
कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग
 
कार्यक्रम के दौरान कांशीराम के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में सत्ता और संसाधन कुछ ही लोगों के हाथों में सिमटे हुए हैं।
 
नौकरशाही और प्रतिनिधित्व पर सवाल
 
राहुल गांधी ने लोगों से देश की नौकरशाही, कॉर्पोरेट क्षेत्र और बड़ी कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन में दलितों, ओबीसी और आदिवासियों के प्रतिनिधित्व पर गौर करने को कहा। उन्होंने कहा कि मनरेगा श्रमिकों की सूची देखने पर वही समुदाय भारी संख्या में नजर आते हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के तहत दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के लिए अवसर सीमित किए जा रहे हैं, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र में भर्ती और इंटरव्यू प्रक्रियाओं में। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी वर्गों को समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व देने में विश्वास रखती है।
 
संविधान का दृष्टिकोण
 
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान किसी एक विचारधारा जैसे सावरकर या गोडसे का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने कहा कि संविधान महात्मा गांधी, डॉ. बीआर अंबेडकर और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का सार है, और इसे अस्वीकार करने वाले संविधान की भावना का सम्मान नहीं करते।
 
समाज में असमानता और विशेषाधिकार
 
राहुल गांधी ने दावा किया कि भारतीय समाज दो हिस्सों में बंट गया है – एक 15 प्रतिशत का विशेषाधिकार प्राप्त अल्पसंख्यक वर्ग और दूसरा 85 प्रतिशत का बहुसंख्यक वर्ग। उन्होंने कहा कि संसाधनों और सत्ता का लाभ ज्यादातर छोटे विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग तक ही सीमित है। राहुल गांधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समानता और हाशिए पर पड़े समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि राजनीति ऐसा करनी चाहिए जो गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों को देश की सत्ता में शामिल होने का अवसर दे।

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