राहुल गाँधी ने GEN -Z से लगाईं गुहार पर GEN -Z के लिए अब तक क्या किया?

 राहुल गाँधी ने GEN -Z से लगाईं गुहार पर GEN -Z के लिए अब तक क्या किया?


आज के समय में देश में तमाम तरह की राजनीतिक मुद्दे हावी है।  कहीं धर्म की राजनीति जारी है तो कहीं वोटर अधिकार यात्रा की तपिश देखने को मिल रही है तो कहीं GEN -Z नाम के एक शब्द बहुत तेजी से सबके बीच में अपना स्थान बना रहा है। GEN -Z कहने को तो सिर्फ एक शब्द पर इस शब्द के मायने कितने बड़े और मजबूत हैं वो अभी हाल के समय में सभी देख चुके हैं। GEN -Z कहने को की केवल एक युवा वर्ग जिसकी उम्र सीमा 15 साल से लेकर 28 साल तक है कुल मिलाकर ये ऊर्जावान युवा वर्ग है जो मजबूत होने के साथ साथ तकनीक रूप से भी मजबूत है जिसने आर्थिक मंदी भी झेली है तो जिसने कोरोना जैसे वैश्विक महामारी से भी संघर्ष किया है। पर इतना ही नहीं ये GEN -Z बड़े बदलाव और परिवर्तन भी कर सकती है। हमारे पड़ोसी मुल्क श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में यही GEN -Z तख्ता पलट करके अपनी एकजुटता और ताकत दोनों का प्रमाण पेश कर चुकी है। अमूनन तीनो देशो में GEN -Z ने भ्रष्टाचार मक्कारी और सरकारी उदासीनता से परेशान होकर सत्ता का तख्ता पलट किया पर अब GEN -Z एक युवा ताकत के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है कोई इनकी हिम्मत और तख्ता पलट को सही मान रहे हैं तो कोई कह रहा है दर्जनों लोगों का मर जाना या नेपाल की संसद को आग लेगा देना।  लोगों को पीट पीट कर मार देना न्यायोचित नहीं है। 

Gen Z

 

पर अब यही GEN -Z वाला मामला देश की सियासत में घमासान मचाये हुए है। क्योंकि नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने अपने देश के युवा वर्ग यानि GEN -Z को लेकर एक पोस्ट कर डाला जो फिलहाल नए विवाद को जन्म दे चुका है। जिसमे नेता प्रतिपक्ष राहुल ने GEN -Z यानि युवा वर्ग से सविधान बचाने देश बचाने की अपील की थी। उसी को अब सत्ताधारी भाजपा ने बड़ा मुद्दा बना डाला है भाजपा का कहना है कि कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी देश के ऊर्जावान युवा वर्ग को भटकाने का काम कर रहे हैं। अगर बात करे भारत में GEN -Z वर्ग की आबादी की तो भारत की आबादी के 27.2 % प्रतिशत GEN -Z यानि युवा वर्ग की आबादी है यानि वर्तमान में देश की आबादी अगर लगभग 146 करोड़ है तो GEN -Z  की कुल आबादी 39. 7 करोड़ है। जो अगर चाहे तो बड़े बड़े बदलाव या परिवर्तन कर सकती है। 

पर अब बात अगर राहुल गाँधी के उस अलग पोस्ट की करें तो राहुल गाँधी सीधे तौर पर देश के GEN -Z यानि युवा वर्ग से मदद की बात कर रहे है कुल मिलाकर देखा जाए तो महसूस होता है कि ये राहुल की देश की अव्यवस्थाओं को देखते हुए युवाओं से अपील की बात ही नहीं की बल्कि एक सोची समझी नीति है कि देश के जोशीले युवा यानि GEN -Z जो एकजुट होकर एक बड़ी ताकत बन चुके हैं। और अब राहुल गाँधी इस ऊर्जा को अपने साथ लाने की कवायद में जुट गए हैं क्योंकि वो भी अच्छी तरह जानते हैं कि अगर युवा वर्ग को अपने साथ ले लिया तो सियासत में बड़ा मुकाम हासिल भी किया जा सकता है। 

Death toll rises in India as protests ...

पर अब गौर करने वाली बात ये है कि अगर राहुल गाँधी युवाओं की यानि GEN -Z की बात करते हैं कि सबसे पहले ये समझना होगा कि उन्होंने इस युवा वर्ग के लिए अब तक क्या कुछ किया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा लड़की हूँ लड़ सकती हूँ के नारे के साथ आती 

है और फिर चुनावी हार के बाद उनका युवाओं से लड़कियों से मोहभंग हो जाता है। और न जाने कितनी लड़कियों के यूपी में अपराध होते रहे न ही राहुल गाँधी इसके लिए आगे आये और न ही प्रियंका गाँधी वाड्रा सवाल केवल यहीं ख़त्म नहीं होते बल्कि और बढ़ते चले जाते हैं मामला लड़कियों के गयव होने का है जिसमे एनसीआरबी का ही आंकड़ा है कि देश से साल 2019 से साल 2021 के बीच 18 साल से अधिक उम्र की 10,61,648  महिलाएं और 18 साल से कम उम्र की 2,51,430 लड़कियां गायब हो गईं। पर अब तक न ही कांग्रेस का कोई आंदोलन हुआ और न कांग्रेस ने बड़े नेता और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी का कोई बड़ी प्रतिक्रिया आयी। अग्निवीर योजना के विरोध में हजारों युवा सड़को पर थे पर शायद उन युवाओं को विपक्ष की संबसे बड़ी पार्टी यानि कांग्रेस का वो सहयोग नहीं मिला जिसकी उन्हें जरुरत थी अगर इस मामले पर कांग्रेस समेत कई दल युवाओं के साथ खड़ी हो जाती तो शायद अग्निवीर योजना ही रोक दी जाती।  चाहे सरकारी नौकरी के लिए लाठी खाते युवाओं की बात हो या फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में [परीक्षा केंद्र पहुँचने के लिए 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के संघर्ष की बात हो न जाने ऐसे युवाओं से जुड़े कई बड़े मुद्दे हो उनके लिए कांग्रेस किन तरह से किसी नेता का बयान या ट्वीट भले ही आ गया हो पर संघर्ष करने के लिए रणनीति बनाते हुए देश के आधार यानि हमारे युवाओं के सड़क पर उतरने की जहमत किसी ने पहले कभी नहीं उठाई।  

 जब जब युवाओं पर जुल्म की अत्याचार की बात होती है तब तब राजनीतिक दल केवल बयान, ज्ञापन और ट्वीट की खानापूर्ति करते नज़र आते हैं। अभी हाल में विहार में राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ने एक साथ आगे बढ़ते हुए वोट चोरी के आरोप लगाते हुए वोटर अधिकार यात्रा निकाली पर जब विहार में नौकरी के लिए मांग करते हुए युवा सड़क पर उतरे तो उन पर विहार पुलिस द्वारा जमकर लाठियां भांजी गयी। तब भी कांग्रेस को इस GEN --Z  वर्ग का साथ देना  चाहिए था सड़क पर उतरना चाहिए था पर यहाँ भी उदासीन प्रक्रिया। 


कुल मिलाकर कहाँ है कि राहुल गाँधी यहाँ GEN  -Z के संविधान और देश बचाने का आवाहन तो करते हैं पर अब तक ये नहीं समझा सके कि जिस युवा वर्ग का वो साथ मांग तरहे हैं उस युवा वर्ग यानि GEN --Z  के लिए आखिर किया क्या है। 

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि जब चुनाव होता है तो युवा यानि  GEN --Z हों या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष गरीब हो या अमीर वोट सभी करते हैं और जब परिणाम आता है तो वो केवल सत्ता के लिए ही नहीं बल्कि विपक्ष के लिए भी होता है। अगर जनता जनार्दन सत्ता पर बैठने लायक बहुमत देती है तो मजबूत विपक्ष के लिए भी बहुमत देती है। सीधे टावर पर कह सकते हैं कि बहुमत सिर्फ सत्ता के लिए ही जरुरी नहीं होता बल्कि मजबूत विपक्ष बनने के लिए भी होता है। लोकतंत्र के दो पहिए होते हैं मजबूत सत्ता पक्ष और मजबूत विपक्ष अगर सत्ता मजबूत है और विपक्ष भी मजबूत है तभी तभी लोकतंत्र की गाड़ी सही चलती है।  विगत आम चुनावो में अगर जनता ने भाजपा गठबंधन को सत्ता पर मजबूती से आसीन कराया है तो विपक्ष को भी बड़ा मजबूत करके लोकतंत्र के मंदिर यानि संसद में भेजा है जिससे जब कभी सत्ता निरंकुश हो और आम आदमी का शोषण हो तो विपक्ष पूरी शिद्दत के साथ अपनी भूमिका निर्वाह कर सके। 

अब ये विपक्ष को तय करना है और आत्ममंथन करना है कि उसने विपक्ष की भूमिका से कहाँ तक निर्वाह किया है। अब समय आ गया है कि विपक्ष और खास तौर पर कांग्रेस अपनी पूरे संगठन को बड़ी लड़ाई के लिए तैयार करे और जनता के बुनियादी मुद्दों के लिए सड़क पर अनवरत उतरने की व्यवस्था करे तभी कुछ बेहतर हो सकेगा। और जमीनी मेहनत के बाद शायद नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को किसी आवाहन की जरूरत नहीं पडेगी देश के युवा खुद व् खुद उनके कदमो से कदम मिलाएगा। लेकिन युवा यहाँ संघर्ष पडोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की तरह उग्र होते हुए सड़क पर उतर नहीं बल्कि अपने वोट के माध्यम से सही व्यक्ति का चुनाव करते हुए परिवर्तन की तरफ बढ़ेगा। और वो परिवर्तन स्थाई होगा न की अस्थाई।  

   

 

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