ग्राम सभा रामसाण्डा में भ्रष्टाचार की परतें उजागर, उच्चस्तरीय जांच की मांग

रायबरेली - ऊँचाहार ग्राम सभा रामसाण्डा में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। गांव के निवासी रामशंकर ने लोकायुक्त को पत्र भेजकर ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा किए गए वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। बैठकें नहीं,फर्जी कार्यवाही जारी रामशंकर का आरोप है कि 18 जून 2021 को ग्राम पंचायत का गठन हुआ था, लेकिन आज तक किसी भी प्रकार की बैठक नहीं हुई। ग्राम प्रधान और सचिव मुख्यालय ऊँचाहार में बैठकर ही कागजों पर योजनाएं तैयार करते हैं और बिना किसी कार्य योजना के ही निर्माण कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

चौदहवें वित्त आयोग में घोटाला

चौदहवें वित्त आयोग के तहत 2 फरवरी 2022 को इंटरलॉकिंग के लिए 8 मजदूरों और 4 मिस्त्रियों को भुगतान किया गया, लेकिन इस कार्य में एक भी महिला मजदूर को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, 20 मार्च 2024 को एक ही दिन में कई कार्यों के लिए दोहरी भुगतान राशि दर्शाई गई, जिससे घोटाले की बू आती है। भुगतान में अनियमितता और जालसाजी 24 जुलाई 2022 को इंटरलॉकिंग के नाम पर 3,26,069 रुपये का भुगतान दर्शाया गया, जिसमें से 3,19,133 रुपये ही जारी किए गए। बाकी 6,936 रुपये का कोई हिसाब नहीं दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ग्राम प्रधान और सचिव ने बंदरबांट की है।

फर्जी जांच समिति और झूठी रिपोर्ट

शिकायतकर्ता ने बताया कि ग्राम पंचायत की वित्तीय स्थिति की जांच के लिए खंड विकास अधिकारी द्वारा चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी, लेकिन मौके पर केवल दो सदस्य ही उपस्थित थे। इसके बावजूद जांच समिति ने बिना उचित निरीक्षण के फर्जी रिपोर्ट भेज दी।

मनरेगा में फर्जी भुगतान का आरोप

मनरेगा के तहत कार्यरत मजदूरों की सूची में धीरज कुमार गुप्ता, आशीष कुमार गुप्ता, अरविंद गुप्ता, रामनिहोरे गुप्ता, गोलू गुप्ता, सेतराम मौर्य, मनीष मौर्य, संदीप तिवारी, बुद्धलाल मौर्य, अमित मौर्य सहित कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वास्तव में शहरों में नौकरी कर रहे हैं। इन फर्जी नामों पर प्रधान और सचिव ने मिलकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया। आईजीआरएस पर शिकायत, फिर भी फाइनल रिपोर्ट में हेरफेर रामशंकर ने 6 सितंबर 2024 को आईजीआरएस पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40015824014585 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उच्चाधिकारियों ने बिना उचित जांच किए फाइनल रिपोर्ट तैयार कर दी और शिकायत का निस्तारण कर दिया। चकमार्ग निर्माण में भारी भ्रष्टाचार गांव के चकमार्ग निर्माण में भी घोटाले का आरोप लगाया गया है। कानपुर रोड से गुला तक बने चकमार्ग में मास्टर रोल पर दर्ज नामों और वास्तविक भुगतान किए गए नामों में भारी भिन्नता पाई गई। मजदूरों की वास्तविक संख्या से अधिक नाम अंकित कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। उच्चस्तरीय जांच की मांग रामशंकर ने लोकायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

रिपोर्टर - आशीष मौर्य

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