शौर्य साहस और पराक्रम की प्रतिमूर्ति महान विरांगना रानी अवंतीबाई लोधी जी का मनाया गया 168 वां बलिदान दिवस।

रायबरेली  :  सरेनी क्षेत्र के अंतर्गत राम खेड़ा गांव में मनाया गया,शौर्य साहस और पराक्रम की प्रतिमूर्ति महान विरांगना रानी अवंतीबाई लोधी जी का मनाया गया 169 वां बलिदान दिवस। जिसका आयोजन पूर्व सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर गिरजा शंकर लोधी ने किया, जिसमें मुख्य अतिथि - अर्जुन सिंह लोधी पूर्व सेवानिवृत्त फौजी ने सबसे पहले भगवान बुद्ध तथा संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर जी और महान विरांगना रानी अवंतीबाई लोधी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें कोटि कोटि नमन बन्दन किया। और उसके जीवन पर प्रकाश डाला। जिसमें मुख्य वक्ता राजेन्द्र कुमार गौतम ने भगवान् बुद्ध एवं संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर तथा महान विरांगना रानी अवंतीबाई लोधी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें कोटि कोटि नमन बन्दन करने के बाद उनके जीवन पर प्रकाश डाला और लोगों को बताया कि रानी अवंतीबाई जी का जन्म 16 अगस्त 1831को ग्राम मनकेड़ी जिला सिवनी मध्यप्रदेश में हुआ था।

सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय विरांगनाओं में गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ने वाली विरांगना रानी अवंतीबाई विक्रमादित्य सिंह, रामगढ़ के भारतीय राजा के शासक की पत्नी थी ब्रिटिश प्रशासन ने विक्रमादित्य का कोई वारिस नहीं छोड़ा। सिर्फ पत्नी रानी अवंतीबाई लोधी बच गई व चार हजार पुरुषों की एक सेना बनाई और इसे खुद नेतृत्व किया, सन् 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ एक भयंकर लड़ाई सुनिश्चित किया, और अवंतीबाई सबसे बहादुरो में लड़ी, लेकिन ब्रिटिश सेना की बेहतर ताकत के खिलाफ लम्बे समय के लिए बाहर नहीं रोक सकता था,जब वह अपने खुद तलवार के साथ खुद को मार डाला। और अंग्रेज़ सेना उसके जीवन में उसे हरा नहीं सका , बाद में रानी अवंतीबाई लोधी का बलिदान स्वीकार किया,जो राज्य के लिए बड़ा उदाहरण बन गया। और 20 मार्च 1858 को आजादी की लड़ाई का इतिहास बन गया, वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थी की बात कहकर अपनी वाणी को विराम दिया। जिस मौके पर रामकिशोर पासी विधानसभा अध्यक्ष सरेनी राकेश कुमार पासी, भाईचारा संयोजक धर्म राज गौतम, महासचिव विजय लोधी, सेक्टर अध्यक्ष रोशन लाल गौतम, रामचंद्र गौतम,राजू गौतम, समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

रिपोर्टर : देवराज 

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