बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा घोषित करें सरकार - दीपक बैज
रायपुर : चक्रवाती अर्नब तूफान के चलते बेमौसम हुई बारिश से फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर तत्काल मुआवजे की घोषणा करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि बेमौसम और प्राकृतिक मार से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हम स्पष्ट मांग करते हैं कि सरकार तत्काल सर्वे करवा कर फसल नुकसानी का आकलन करे और जहां पर भी फसल पूरी तरह खराब हुआ है, वहां धान के लिये 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ अर्थात 70,518 रुपए प्रति एकड़ एकमुश्त मुआवजा देने का ऐलान करें। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि खराब मौसम, कीट प्रकोप और अतिवृष्टि से किसानों की खरीफ फसल, विशेषकर धान पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। सरकार ने अब तक कोई ठोस सर्वे या नुकसानी का आकलन नहीं कराया है। प्रशासनिक उदासीनता ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। फसल नुकसानी, धान खरीदी की अनिश्चितता, टोकन-तौल की धांधली और पटवारी हड़ताल के कारण ठप पड़े राजस्व पंजीयन ने यह साबित कर दिया है कि यह सरकार किसान-विरोधी और जन-विरोधी है। चुनाव के समय किसानों से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज जब किसान संकट में है, तो सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह सरकार धान खरीदी और किसानों दोनों को लेकर पूरी तरह गंभीर नहीं है। धान खरीदी कब तक की जायेगी, यह अवधि भी सरकार नहीं बता पा रही है। टोकन, तौलाई, परिवहन और मिलिंग को लेकर कोई ठोस नीति अब तक घोषित नहीं है। पटवारी हड़ताल के कारण महीनों से राजस्व प्रकरण लंबित हैं, जिससे किसानों की जमीन के बटवारा, नामांतरण, फौत और फसल ऋण, पंजीयन ठप पड़े हैं। सरकार इस प्रशासनिक गतिरोध को दूर करने में पूरी तरह विफल रही है। छत्तीसगढ़ का किसान पहले ही लागत मूल्य खाद, बीज, डीजल, कृषि श्रम की महंगाई से त्रस्त था। अब फसल बर्बादी के बाद उस पर कर्ज के जाल में फंसने और भुखमरी की कगार पर पहुँचने का संकट खड़ा हो गया है। सरकार की असंवेदनशीलता से अन्नदाता की दिवाली और गृहस्थी उजड़ रही है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और यहाँ का किसान प्रदेश की रीढ़ है। रीढ़ पर वार करने वाली इस सरकार की किसानों के हक की राशि रोकने का कोई अधिकार नहीं है, 1700 करोड़ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के चौथे किश्त का बकाया और विगत 2 वर्षों की एमएसपी वृद्धि के अंतर का 4366 सहित 6066 करोड़ का लंबित भुगतान तत्काल करे सरकार।
रिपोर्टर : मज़हर इकबाल

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