दसवीं के बाद सही विषय चयन कैसे करें? पेरेंट्स और विद्यार्थियों के लिए चुनौती- डॉ नयन प्रकाश गांधी करियर कोच
कोटा : हाल ही में राजस्थान बोर्ड के दसवीं कक्षा के परिणाम आ गए है आगे सीबीएसई बोर्ड एवं अन्य विभिन्न स्टेट के दसवीं बोर्ड का भी परिणाम आ रहा है ,परंतु परिणाम के बाद दसवीं कक्षा के बाद का समय किसी भी विद्यार्थी के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ होता है। यही वह चरण है, जहाँ लिया गया एक निर्णय उसके पूरे भविष्य की दिशा निर्धारित कर देता है। इसलिए विषय चयन को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया समझना उचित नहीं है, बल्कि इसे एक सोच-समझकर लिया गया रणनीतिक निर्णय होना चाहिए।अक्सर देखा जाता है कि पेरेंट्स विषय चयन को केवल अंकों (मार्क्स) के आधार पर या ऐसा पास मित्र ,रिश्तेदार ,पड़ोसी की सोच से तय करते हैं। यदि बच्चा अच्छे अंक ले आता है, तो उसे सीधे साइंस में भेज दिया जाता है, जबकि उसकी वास्तविक रुचि, क्षमता और सोचने के तरीके पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। यही वह गलती है, जो आगे चलकर बच्चे के करियर में असंतुलन और मानसिक तनाव का कारण बनती है,और अधिकतर ऐसे बच्चे का मानसिक स्तर तनाव में आ जाता है ।वास्तविकता यह है कि हर बच्चा अलग होता है। उसकी रुचि (इंटरेस्ट), क्षमता (एप्टीट्यूड) और मानसिक संरचना (माइंडसेट) भिन्न होती है। ऐसे में एक जैसा निर्णय सभी पर लागू करना सही नहीं है। सही विषय चयन वही है, जो बच्चे की स्वाभाविक रुचि और योग्यता के अनुरूप हो।आज के समय में विषयों और करियर के विकल्पों की विविधता पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। दसवीं के बाद विद्यार्थियों के पास साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स (ह्यूमैनिटीज) के साथ-साथ वोकेशनल कोर्सेज और डिप्लोमा प्रोग्राम्स जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलॉजी के माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल और रिसर्च के क्षेत्र खुलते हैं। वहीं कॉमर्स के साथ अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडीज और इकोनॉमिक्स के जरिए फाइनेंस, चार्टर्ड अकाउंटेंट और मैनेजमेंट में अवसर मिलते हैं। आर्ट्स में भी अब व्यापक संभावनाएँ हैं—जैसे साइकोलॉजी, मीडिया, सिविल सर्विस, सोशल वर्क स्टडीज ,पब्लिक पॉलिसीज ,और सोशल साइंसेज और साथ ही कई क्षेत्रों में प्रबंधन में उच्चस्तरीय करियर में भी आर्ट्स ग्रेजुएट को त्वजो दी जाती है ।इसलिए यह आवश्यक है कि विषय चयन से पहले बच्चे की क्षमता को वैज्ञानिक तरीके से समझा जाए। साइकोमेट्रिक असेसमेंट और एप्टीट्यूड टेस्ट जैसे इंस्ट्रूमेंट इस दिशा में बहुत उपयोगी हैं,और एक प्रशिक्षित करियर कोच के माध्यम से पेरेंट्स बच्चे के बेहतर करियर प्रबंधन हेतु ,संकाय चयन हेतु सलाह ले सकते है ,क्योंकि जब बच्चे हर संकाय में मौजूद करियर के समेकित रोडमैप के बारे में जागरूक होंगे तो उनके समक्ष आत्मविश्वास के साथ सही सब्जेक्ट्स चयन करने हेतु एक विशेष रोडमैप तैयार होगा ,जिससे वे अपने शॉर्ट टर्म के साथ लॉन्ग टर्म उद्देश्य के साथ स्वय को बेहतर करियर में संलग्न कर सकते है। करियर कोच की भूमिका आज इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि आज करियर ऑप्शन बहुत है हर संकाय में परंतु माता पिता ,बच्चे उससे जागरूक नहीं होते है ,और एक भेद चाल में बच्चे एकेडमिक दसवीं के मार्क्स पर सीधे कॉमर्स या सीधे मैथ्स या बायोलॉजी या एग्रीकल्चर आदि सब्जेक्ट ले लेते ये जाने बिना की उसमें उनकी रुचि भी है या नहीं ,उसमें करियर ऑप्शन क्या क्या है ,सरकारी क्षेत्र के साथ हर करियर में निजी जॉब्स की संभावनाएं भी देखना आज आवश्यक है ,प्रशिक्षित करियर कोच केवल बच्चे की रुचि का विश्लेषण नहीं करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि वह किस प्रकार के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।करियर कोच एक तरह से आपके बच्चे की रि इंजीयरिंग करते है ,मेंटल एबिलिटीज को समझते है ,समग्र रुचि ,एकेडमिक के साथ प्रैक्टिकल मेंटल अंडरस्टैंडिंग ,सोशल पृष्टभूमि आदि समझते है उसके आधार पर कोच प्रोपर मार्गदर्शन देते है ,हर संकाय से संबंधित गहराई से उसमें मौजूद हर करियर स्टेप्स को सिस्टमटिकली उजागर करते है ,इससे बच्चे में एक विस्तृत करियर रोडमैप के साथ एक रुचिगत करियर ऑप्शन चयन किया जाता है ,जिससे उसकी मानसिक अभिव्यक्ति स्वत एक आत्मानुभूति के साथ पल्लवित होती है और अगर यहां पेरेंट्स की भूमिका यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें बच्चों के साथ खुला संवाद (ओपन कम्युनिकेशन) बनाए रखना चाहिए। बच्चों की इच्छाओं, उनके डर और उनकी सोच को समझना जरूरी है। यदि पेरेंट्स एक मित्र और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, तो बच्चा अधिक आत्मविश्वास के साथ सही निर्णय ले पाता है।यह भी जरूरी है कि विषय चयन को सामाजिक प्रतिष्ठा से न जोड़ा जाए। “साइंस ही सबसे अच्छा है” या “आर्ट्स में स्कोप नहीं है” जैसी धारणाएँ अब बदल चुकी हैं। आज का युग मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन का है, जहाँ हर क्षेत्र में अवसर मौजूद हैं,बशर्ते सही दिशा और मेहनत हो।एक सही विषय चयन न केवल बच्चे के करियर को दिशा देता है, बल्कि उसके आत्मविश्वास और संतुष्टि को भी बढ़ाता है। यदि यह निर्णय समझदारी और संतुलन के साथ लिया जाए, तो वही बच्चा भविष्य में एक सफल और जिम्मेदार नागरिक बन सकता है। दसवीं के बाद विषय चयन एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय है। पेरेंट्स और विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इसे जल्दबाजी या दबाव में न लें, बल्कि सोच-समझकर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ और आपसी संवाद के आधार पर निर्णय लें।याद रखें—सही विषय वहीं है, जहाँ बच्चे की रुचि, क्षमता और लक्ष्य एक साथ मिलते हैं।
रिपोर्टर : रमेश चन्द्र शर्मा

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