“बिना नाम, बिना ब्रांड का तेल: आखिर यह खेल कैसे चल रहा है?”

 बारां : बारां जिले में खुले तेल की बिक्री को लेकर अब मामला और गंभीर होता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना किसी ब्रांड, बिना लेबल और बिना पते के तेल आखिर बाजार में कैसे पहुंच रहा है और खुलेआम बिक भी रहा है?
 नियम क्या कहते हैं?
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद पर—
निर्माता का नाम
पैकिंग की जानकारी
एक्सपायरी डेट
और गुणवत्ता प्रमाणन
देना अनिवार्य होता है। इसके बिना बिक्री स्पष्ट रूप से नियमों के खिलाफ मानी जाती है।
 तो फिर जमीन पर हकीकत अलग क्यों?
स्थानीय बाजारों में 30 लीटर के कैनों में ऐसा तेल देखा जा रहा है—
जिस पर कोई ब्रांड नहीं
कोई लेबल नहीं
और स्रोत की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं
ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि यह सप्लाई चेन कहां से शुरू हो रही है और किस स्तर पर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?
 संगठित नेटवर्क की आशंका
तहसील स्तर तक इसकी लगातार सप्लाई यह संकेत देती है कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं, बल्कि एक संगठित व्यवस्था के तहत हो रहा कारोबार हो सकता है।
लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
जनता के भरोसे पर असर
जब खाद्य सामग्री जैसी संवेदनशील चीज बिना पहचान के बिके, तो इसका सीधा असर आम लोगों के विश्वास और स्वास्थ्य पर पड़ता है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस तरह का तेल लंबे समय में Fatty Liver Disease जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।
 सीधे सवाल, साफ जवाब की जरूरत
बिना ब्रांड और बिना पहचान वाला तेल बाजार तक कैसे पहुंच रहा है?
क्या निगरानी तंत्र इस पर नजर रख पा रहा है?
और सबसे अहम—क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
निष्कर्ष: यह मुद्दा किसी एक दुकान या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
जरूरत है कि संबंधित विभाग इस पर स्पष्ट स्थिति रखे और तथ्य सामने लाए, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।

रिपोर्टर : पंकज राठौर

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.