कम उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं की संख्या राजस्थान में बढ़ी
राजस्थान में कम उम्र में विवाह और बाल विवाह अब भी आम माना जाता है, और इसका प्रभाव लड़कियों की सेहत पर सीधे देखने को मिल रहा है। हाल ही में जारी NFHS-6 (2023–24) रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि राज्य में कम उम्र में गर्भवती होने वाली लड़कियों की संख्या देश में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में गर्भावस्था की दर 3.7% से बढ़कर 4.7% हो गई है, जबकि पिछला सर्वे 2019–21 के बीच हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे बाल विवाह, शिक्षा की कमी और जागरूकता का अभाव भी है। कम उम्र में गर्भवती होने वाली लड़कियों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक होते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं में कमी देखी गई है। अस्पताल में प्रसव सुविधाओं की कमी, बच्चों का टीकाकरण पूरी तरह न होना और बच्चों की अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं गंभीर रूप से सामने आई हैं।
इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए राज्य के 50 से अधिक सामाजिक संगठनों ने सरकार से त्वरित कदम उठाने की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि बाल विवाह को रोकने, लड़कियों की शिक्षा बढ़ाने और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए व्यापक अभियान की आवश्यकता है। उनका मानना है कि केवल कानूनी कदम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समाज में बदलाव और स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की सक्रियता भी जरूरी है।
राजस्थान में कम उम्र की गर्भावस्था के बढ़ते आंकड़े केवल एक स्वास्थ्य चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह समाज और परिवार दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में माताओं और बच्चों की सेहत पर और अधिक विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
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