राजस्थान निकाय चुनाव में कौन बना सिकंदर? BJP-कांग्रेस से लेकर दिग्गजों तक का हिसाब
राजस्थान की सियासत में नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने ऐसा सियासी संदेश दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में जयपुर से लेकर जोधपुर और भरतपुर से लेकर झालावाड़ तक सुनाई दे सकती है। जी हां साल 2026 के निकाय चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, और इन परिणामों ने बता दिया है कि राजनीति में कब किसकी गद्दी छिन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। 309 नगरीय निकाय...हजारों वार्ड...बीजेपी बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर...और इनके बीच निर्दलीयों ने ऐसा खेल बिगाड़ा कि कई बड़े नेताओं के अपने ही गढ़ में सियासी समीकरण बदल गए। कहीं बीजेपी ने कांग्रेस को पछाड़कर अपना शहरी किला और मजबूत किया...तो कहीं कांग्रेस ने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाकर बड़ा संदेश दे दिया। लेकिन कहानी सिर्फ बीजेपी की जीत और कांग्रेस की हार की नहीं है...क्योंकि इस चुनाव में कहीं सीएम भजनलाल शर्मा का कद बढ़ा, कहीं डिप्टी सीएम दीया कुमारी गेनर बनकर उभरीं...तो कहीं गोविंद डोटासरा और सचिन पायलट ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में दम दिखाया। और सबसे दिलचस्प बात...दिग्गज नेताओं के अपने वार्ड में भी पार्टियां हार गईं। आइए, आपको बताते हैं कि इस चुनावी महाभारत में कौन बना सिकंदर और किसका पत्ता हुआ साफ...देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...
इस बार का निकाय चुनाव का रण बहुत बड़ा था। राज्यभर में कुल 10,244 वार्डों के लिए वोट डाले गए, जिनमें दो चरणों 9 और 11 सितंबर को मतदान हुआ था। सबसे पहले अगर बीजेपी की बात करें तो, 309 नगरीय निकायों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर बढ़त बनाई है। जी हां पार्टी ने कुल 4,179 वार्ड जीतकर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। कुल वोट शेयर के हिसाब से बीजेपी को 40.8% हिस्सेदारी मिली है, जो पिछले चुनावों के मुकाबले करीब 5% ज्यादा है। वहीं विपक्षी कांग्रेस ने भी हार नहीं मानी और 3,613 वार्ड जीतकर अपनी मजबूत जमीन दिखाई। हालांकि, उनकी कुल हिस्सेदारी पिछले बार के मुकाबले थोड़ी घटकर 35.3% पर आ गई है। लेकिन इस चुनाव में निर्दलीयों ने भी कमाल कर दिया। जी हां इस चुनाव के असली 'किंगमेकर' निर्दलीय साबित हुए हैं, जिन्होंने बंपर 2,273 वार्ड अपने नाम किए हैं। कई जगहों पर अब इन्हीं निर्दलीयों के हाथ में बोर्ड बनाने की चाबी है! यानी राजस्थान के शहरों में करीब-करीब हर पांचवां वार्ड ऐसा है जहां किसी बड़े राजनीतिक दल के बजाय जनता ने निर्दलीय उम्मीदवार पर भरोसा जताया। ग्राफिक के जरिए अगर हम समझे तो.....
बीजेपी----4,179 वार्ड---40.8%
कांग्रेस----3,613 वार्ड----35.3%
निर्दलीय---2,273 वार्ड---22.2%
अब जरा इन आंकड़ों को हम पिछले निकाय चुनाव से जोड़कर समझते है...आपको बता दें...
पिछली बार बीजेपी के पास करीब 2 हजार 666 वार्ड थे।
इस बार ये आंकड़ा बढ़कर 4 हजार 179 हो गया।
यानी बीजेपी की वार्ड संख्या में करीब 56.8 फीसदी का इजाफा हुआ।
कांग्रेस के पास पिछली बार करीब 3 हजार 42 वार्ड थे।
इस बार कांग्रेस 3 हजार 613 पर पहुंची।
यानी कांग्रेस की सीटें बढ़ीं जरूर, लेकिन बढ़ोतरी करीब 18.7 फीसदी रही।
और यही इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी है।
दरअसल, राजस्थान में परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या भी बढ़ी है। करीब 2 हजार 770 नए वार्ड जुड़े और कुल वार्डों की संख्या में करीब 37 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। लेकिन बीजेपी की सीटें करीब 56.8 फीसदी बढ़ीं...जबकि कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी सिर्फ 18.7 फीसदी रही। यानी वार्ड बढ़ने का फायदा बीजेपी ने कहीं ज्यादा तेजी से उठाया। वहीं अब आते हैं राजस्थान के बड़े शहरों पर...जयपुर... उदयपुर... कोटा... भीलवाड़ा जैसे बड़े नगर निगमों में बीजेपी ने बहुमत हासिल करके अपना दबदबा कायम किया। सबसे ज्यादा चर्चा राजधानी जयपुर की हुई...जहां जयपुर नगर निगम में बीजेपी ने 78 वार्ड जीतकर बोर्ड पर कब्जा जमाया। और यहीं से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दीया कुमारी की सियासी भूमिका भी चर्चा में आ गई। आपको बता दें यह चुनाव सिर्फ पार्टियों की हार-जीत नहीं, बल्कि राज्य के दिग्गज नेताओं की साख का इम्तिहान था। ऐसे में चलिए देखते हैं किस नेता के इलाके में क्या कमाल हुआ।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
सबसे पहले बात करते है प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा की। सीएम साहब के नेतृत्व में पार्टी को पूरे प्रदेश में भले ही बड़ी जीत मिली हो, लेकिन उनके अपने गृह जिले भरतपुर नगर निगम में बीजेपी को जोरदार झटका लगा है। भरतपुर के 65 वार्डों में से बीजेपी सिर्फ 20 सीटों पर सिमट गई, जबकि निर्दलीयों ने 36 सीटों पर कब्जा जमाकर बाजी मार ली।
वसुंधरा राजे और मदन राठौड़
बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का गढ़ माने जाने वाले झालावाड़ में इस बार ऐसा चक्रव्यूह टूटा कि सब हैरान रह गए। झालावाड़ नगर परिषद पर सालों से काबिज बीजेपी को पछाड़ते हुए कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर बोर्ड पर कब्जा जमा लिया। वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली में भी पार्टी पिछड़ गई और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
अशोक गहलोत
पूर्व सीएम अशोक गहलोत के गृह नगर जोधपुर नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच महामुकाबला हुआ और दोनों पार्टियां 44-44 सीटों पर बराबरी पर आकर रुक गईं। यहाँ भी निर्दलीय ही असली चाबी लेकर बैठे हैं। मजे की बात तो यह है कि खुद गहलोत साहब के अपने वार्ड में कांग्रेस चुनाव हार गई!
सचिन पायलट
पायलट साहब के लिए नतीजे काफी राहत भरे रहे। उनके प्रभाव वाले टोंक, दौसा और अजमेर में पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया। गुर्जर बेल्ट में उनका असर साफ नजर आया।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी
जयपुर नगर निगम में बीजेपी की स्पष्ट बहुमत वाली जीत और विद्याधर नगर में पार्टी के धमाकेदार प्रदर्शन ने दीया कुमारी का सियासी कद और मजबूत कर दिया है।
आपको बता दें चुनाव के इन नतीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर राजस्थान की जनता का दिल से आभार जताया। पीएम ने इसे 'झूठ की गूंज' पर सच्चाई और 'डबल-इंजन सरकार' की नीतियों की जीत बताया। वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस के कुशासन को नकार कर विकास पर मुहर लगाई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो राजस्थान के नगर निकाय चुनाव ने तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है...कहीं जनता जनार्दन ने इस बार किसी को सिर आँखों पर बिठाया, तो किसी को जमीन दिखा दी! जीत-हार के इन आंकड़ों के बीच अब असली खेल शुरू होने वाला है 21 सितंबर को, जब मेयर और सभापतियों की असल ताजपोशी होगी। जहाँ एक तरफ बीजेपी अपनी इस बढ़त को भुनाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस और निर्दलीय भी अपनी चालें चलने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि जोड़-तोड़ के इस खेल में कौन बाजी मारता है और किसके सिर सजता है जीत का ताज!
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