रामप्रकाश गुप्ता की भविष्यवाणी और राजनाथ सिंह की उड़ान

1976 का साल था, उत्तर प्रदेश की एक जेल में इमरजेंसी का दौर चल रहा था। वहां दो राजनीतिक कैदी बंद थे। एक बुजुर्ग नेता था, जो दूसरे जवान नेता के हाथ को देख रहा था और कहा, “तुम एक दिन बहुत बड़े नेता बनोगे।” जवान ने हँसकर पूछा, “कितना बड़ा?” बुजुर्ग ने जवाब दिया, “यूपी का मुख्यमंत्री जितना बड़ा।” उस वक्त वह जवान सिर्फ 24 साल का था, और उसकी पार्टी प्रदेश में तीसरे या चौथे नंबर पर थी। मुख्यमंत्री बनना दूर की बात लगती थी। लेकिन 24 साल बाद, वही नौजवान यूपी का मुख्यमंत्री बन गया। और वह बुजुर्ग था रामप्रकाश गुप्ता, जो पहले यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके थे, जबकि वह नौजवान था राजनाथ सिंह।

राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के बभोरा गांव में हुआ था। उनके पिता राम बदन सिंह और माता गुजराती देवी थीं। 13 साल की उम्र से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से फिजिक्स में मास्टर की डिग्री हासिल की और मिर्जापुर के के.बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय में फिजिक्स प्रोफेसर भी रहे। लेकिन जल्द ही राजनीति ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया।

1974 में राजनाथ सिंह ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इमरजेंसी के दौरान कई महीने जेल में रहने वाले राजनाथ सिंह को 1975 में जनसंघ द्वारा मिर्जापुर जिले का अध्यक्ष बनाया गया। 1977 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर विधायक बने। धीरे-धीरे वे पार्टी के महत्वपूर्ण नेता बनते गए। 1991 में जब बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई, तो राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री बने। इस पद पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जैसे माध्यमिक परीक्षाओं में नकल विरोधी कानून लागू करना, वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल करना, और इतिहास की किताबों में संशोधन करना।

1994 में राज्यसभा सदस्य बने और बाद में उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व किया। अक्टूबर 2000 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई बड़े फैसले लिए, लेकिन 2002 के चुनाव में पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद भी उनका राजनीतिक कद गिरा नहीं। उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की कैबिनेट में कृषि मंत्री बनाया गया।

राजनाथ सिंह का राजनीतिक करियर केंद्रीय स्तर पर भी बेहद प्रभावशाली रहा। 1999 में उन्हें भूतल एवं जल परिवहन विभाग का मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना जैसी बड़ी योजनाएं शुरू कीं। 2002 में कृषि मंत्री बने और किसानों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जिनमें किसान कॉल सेंटर और कृषि आय बीमा योजना प्रमुख थीं।

राजनाथ सिंह दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे (2005-2009 और 2013-2014)। 2014 और 2019 में वे लखनऊ से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 2019 से वे भारत के रक्षामंत्री के पद पर कार्यरत हैं और 2024 में पुनः इसी पद पर चुने गए।

राजनाथ सिंह का राजनीतिक सफर एक प्रेरणा है। एक फिजिक्स प्रोफेसर से लेकर देश के रक्षा मंत्री बनने तक का उनका सफर बताता है कि मेहनत, ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। यूपी में शिक्षा मंत्री के रूप में उनके सुधार आज भी याद किए जाते हैं। उनकी पुस्तक "Unemployment, its Reasons and Remedies" भी उनके गहन चिंतन और समाज सेवा की भावना को दर्शाती है।

राजनाथ सिंह ने न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति को आकार दिया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है। उनकी उपलब्धियां और नेतृत्व भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।

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