समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे। लंबे समय से हृदय और किडनी से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे राम गोविंद चौधरी का लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में इलाज चल रहा था। रात करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
समाजवादी पार्टी के मीडिया प्रभारी सुशील पांडे के मुताबिक, राम गोविंद चौधरी को करीब दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। मैक्स अस्पताल में भी उनका लंबे समय तक इलाज चला और उन्हें डायलिसिस भी कराना पड़ा था।
राम गोविंद चौधरी अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आठ बार विधायक रहे। उन्होंने मार्च 2017 से मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। वह समाजवादी पार्टी की सरकारों में मंत्री भी रहे। मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्होंने दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री पद संभाला, जबकि वर्ष 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे। दशकों तक समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे राम गोविंद चौधरी कमजोर और वंचित वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे।
राम गोविंद चौधरी के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने शोक जताया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा का पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री बताते हुए उनके निधन को अत्यंत दुखद बताया। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी राम गोविंद चौधरी के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष बताया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि राम गोविंद चौधरी के निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।
राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे बड़े चौधरी ने शुरुआती शिक्षा गांव और सिकंदरपुर से हासिल की। इसके बाद उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में बीएससी में दाखिला लिया। छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दाखिला लिया और छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1972 में वह टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री और 1974 में अध्यक्ष चुने गए।
आपातकाल के दौरान राम गोविंद चौधरी लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चलाए गए आंदोलनों में सक्रिय रहे। इस दौरान वह जिले की 'छात्र युवा वाहिनी' के सह-संयोजक भी बने। आंदोलन के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा और बलिया तथा बाराबंकी की जेलों में रखा गया। उन्होंने 'संपूर्ण क्रांति' के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ भी काम किया और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे।
राम गोविंद चौधरी के निधन से समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर है। उनके परिवार में बेटा और अन्य परिजन हैं।

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