अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, ट्रस्ट समेत केंद्र और यूपी सरकार को घेरा

अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करते हुए न सिर्फ केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस थमाया है, बल्कि मंदिर का प्रबंधन देखने वाले 'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' को भी जवाबदेह बनाते हुए नोटिस जारी किया है।

क्या है पूरा मामला?

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन प्रमुख पक्षों केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

कोर्ट में सरकार और ट्रस्ट को लगा झटका

सनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि राम मंदिर ट्रस्ट को इस नोटिस से बाहर रखा जाए या इसे फिलहाल टाल दिया जाए। लेकिन, तीन जजों की पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और ट्रस्ट को भी इस मामले में शामिल रखा।

सबूतों और पारदर्शिता पर तकरार

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने कोर्ट के सामने मांग रखी कि चोरी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूतों, जैसे कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स, को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि उनके साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

इसके साथ ही, याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट उन्हें भी दिखाई जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर फिलहाल रोक लगाते हुए कहा:

"चूंकि जांच अभी चल रही है, इसलिए स्टेटस रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को देने पर विचार बाद में किया जाएगा। फिलहाल एसआईटी अपनी रिपोर्ट सीधे कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपे।"

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी पर जल्द से जल्द इस मामले की परतें खोलने का दबाव बढ़ गया है। सीलबंद लिफाफे में आने वाली रिपोर्ट ही तय करेगी कि मंदिर की सुरक्षा और चढ़ावे के प्रबंधन में कहां चूक हुई थी।

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