अयोध्या में 19 घंटे की महा-पड़ताल! SIT की पेनड्राइव में कैद हुआ राम मंदिर का सबसे बड़ा गुनहगार?

जिस राम मंदिर के लिए करोड़ों हिंदुओं ने 500 साल तक खून-पसीना बहाया, श्रद्धा से अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, उसी रामलला के दरबार से आस्था को शर्मसार करने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है! जी हां राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये की कथित चोरी और वित्तीय हेराफेरी के आरोपों के बाद अयोध्या में हड़कंप मच गया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने राम जन्मभूमि परिसर में डेरा डाल दिया है। दिन-रात एक करके, सीसीटीवी कैमरों को खंगालते हुए और दानपात्रों की चीर-फाड़ करते हुए जांच टीम ने अब तक कुल 19 घंटे की महा-पड़ताल की है। करोड़ों भक्तों की आंखें इस वक्त अयोध्या पर टिकी हैं कि आखिर रामलला के खजाने पर डाका डालने वाले वो सफेदपोश गुनहगार कौन हैं?

दरअसल, SIT की तीन सदस्यीय टीम बीते तीन दिनों से अयोध्या नगरी में जमी हुई है। 15 जून की दोपहर ठीक 2:50 बजे जब SIT की टीम ने राम मंदिर परिसर में कदम रखा, तो वहां मौजूद अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। पहले दिन टीम ने लगातार 8 घंटे तक चप्पे-चप्पे को खंगाला और 43 लोगों से कड़ी पूछताछ की। इसके बाद भी टीम की प्यास नहीं बुझी, तो दूसरे दिन मंगलवार सुबह 11 बजे टीम दोबारा परिसर में दाखिल हुई और रात के 11 बजे तक पूरे 11 घंटे तक मैराथन जांच की। इन दो दिनों के भीतर कुल 19 घंटे तक मंदिर परिसर के भीतर रहकर जांच टीम ने दानपात्र से पैसे निकालने, गड्डियां बनाने और पैसों को गिनने की पूरी व्यवस्था को खुद अपनी आंखों से परखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव भी वहीं मौजूद रहे। शाम 5 बजे यात्री सुविधा केंद्र के दान पात्र पर स्थलीय निरीक्षण किया गया। SIT ने चढ़ावा रूम का सीसीटीवी डेटा करीब एक दर्जन पेनड्राइव में जब्त कर लिया है। अब उन पूर्व कर्मचारियों का डेटा निकाला जा रहा है जो पहले इस व्यवस्था में शामिल थे, उनसे भी कड़ाई से पूछताछ होगी। 

आपको बता दें अब तक की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वो यह कि दान व्यवस्था से जुड़े 9 ऐसे कर्मचारी रडार पर आए हैं जिन्होंने हाल ही में अचानक बेहद महंगे स्मार्टफोन और चमचमाती गाड़ियां खरीदी हैं। इन कर्मचारियों की अचानक बदली लाइफस्टाइल ने SIT के कान खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों को भी तलब किया गया और उनके कामकाज व दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। आज तीसरे दिन भी बैंक कर्मचारियों और दान की गणना करने वाले संदिग्ध कर्मचारियों को राम मंदिर परिसर के यात्री निवास में बुलाकर तीखे सवाल-जवाब किए गए। वही इस पूरे विवाद के बीच पुलिस के पास 3 बड़ी लिखित शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। पहली शिकायत राम आंदोलन के फायरब्रांड नेता संतोष दुबे ने दर्ज कराई है, जिसमें चढ़ावे के साथ-साथ कीमती शिलाएं चोरी होने का सनसनीखेज आरोप है। दूसरी शिकायत यूपी करणी सेना के प्रमुख अभिनव सिंह और तीसरी शिकायत यूथ कांग्रेस की ओर से आई है। इन शिकायतों में दावा किया गया है कि मंदिर के चढ़ावे से बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और आभूषण गायब किए गए हैं और ट्रस्ट के पदाधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है। इन शिकायतों के आधार पर इस कथित घोटाले के 6 मुख्य किरदार सामने आए हैं। जिसमें...

लवकुश मिश्रा: यह कैश गणना टीम का सदस्य है, जिसके घर से 5 लाख रुपये कैश बरामद होने की चर्चा तेज है।

अनुकल्प मिश्रा: यह गणना टीम का हेड है और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी अनिल मिश्रा का भतीजा बताया जा रहा है। इसने हाल ही में 65 लाख रुपये का मकान खरीदा है, जो जांच के दायरे में है।

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: यह राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर और बेहद करीबी है, जो बैंक मैनेजमेंट का काम देखता है।

मनीष यादव: यह टिन्नू यादव का सगा भतीजा है और मंदिर परिसर में काम करता था।

करुण: यह भी कैश गिनती टीम से जुड़ा हुआ है, जिसकी संपत्ति में अचानक रहस्यमयी उछाल देखा गया है।

अवनीश मिश्रा: यह प्रबंधन और गिनती की पूरी प्रक्रिया में गहराई से शामिल रहा है।

इन सभी के खिलाफ शिकायतों में पॉलीग्राफ टेस्ट कराने और तुरंत गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। भक्तों में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि 2 करोड़ रुपये की रिकवरी की चर्चाओं और 3-3 शिकायतों के बावजूद अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक FIR दर्ज क्यों नहीं की गई है। वहीं इस पूरे मामले के केंद्र में आए 51 वर्षीय रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव ने आखिरकार कैमरे के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह निराधार और झूठा बताया है। टिन्नू ने भावुक होते हुए कहा, मुझे चंपत राय जी का करीबी होने के कारण जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। वहीं 50 करोड़ की संपत्ति और आलीशान होटल-रेस्टोरेंट के दावों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, "मेरा कोई होटल नहीं है। मैं संगठन के काम के साथ साइड में ऑटो चलाता था। ऑटो की आमदनी और संगठन से मिलने वाले मानधन को जोड़कर मैंने घर बनाया था। 

इतना ही नहीं इस महाघोटाले के सामने आने के पीछे ट्रस्ट की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने 'श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का गठन किया था, जिसमें 15 सदस्य शामिल थे। नियम के मुताबिक सबके दायित्व तय थे, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद से केवल 3-4 सदस्य ही पूरी तरह सक्रिय रहे, जबकि बाकी सदस्य बीमारी या अन्य कारणों से सिर्फ वर्चुअल बैठकों तक सीमित रहे। यही वजह है कि जब गबन का मामला खुला, तो उंगलियां सीधे इन्हीं कुछ सक्रिय चेहरों पर उठ रही हैं। हालांकि आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब राम मंदिर ट्रस्ट विवादों में आया है। इससे पहले साल 2021 और 2022 में भी 208 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण को लेकर भारी बवाल हुआ था। तब आरोप लगा था कि सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी नामक व्यक्तियों ने जो जमीन 2 करोड़ रुपये में खरीदी थी, उसे महज कुछ ही मिनटों बाद ट्रस्ट को 18 करोड़ 50 लाख रुपये में बेच दिया गया। वहीं अयोध्या के तत्कालीन मेयर के एक रिश्तेदार ने भी 20 लाख की जमीन को 2.50 करोड़ में ट्रस्ट को ट्रांसफर किया था। हालांकि तब ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन इस बार सीधे दानपात्र में सेंधमारी ने पुराने घावों को हरा कर दिया है। दूसरी तरफ इस मामले ने अब एक भीषण राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस घपले पर एक बेहद विस्फोटक बयान देकर अपनी ही सरकार और ट्रस्ट को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा, बिना आग के धुआं नहीं निकलता, जो धुआं उठ रहा है उसमें कुछ न कुछ सच्चाई जरूर है। अगर राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, तो सरकार को इसे बेहद गंभीरता से लेना चाहिए।

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने SIT की निष्पक्षता पर ही अविश्वास जताते हुए इस पूरे महाघोटाले की जांच सीधे हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की है। वहीं देश भर के धर्मगुरुओं और संतों ने चिंता जताते हुए मांग की है कि ट्रस्ट में केवल ऐसे परम धार्मिक लोगों को ही जगह मिलनी चाहिए जिनके मन में ईश्वर और पाप का सच्चा भय हो। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी इसे अत्यंत गंभीर मामला बताते हुए कहा है कि रामलला के चढ़ावे की चोरी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। आपको बता दें इस पूरे महा-विवाद और भारी उठापटक के बावजूद, देश-विदेश से आने वाले रामभक्तों की आस्था अडिग है। मंदिर में चल रही जांच के बीच भी भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है और रामलला के चरणों में चढ़ावा लगातार आ रहा है। 

सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में भी हर दिन लगभग 18 से 20 लाख रुपये नकद चढ़ावे के रूप में मिल रहे हैं। प्रतिदिन इस धनराशि की गिनती कर इसे भारतीय स्टेट बैंक की निर्धारित शाखा में जमा कराया जा रहा है और बीते 10 दिनों के भीतर ही लगभग दो करोड़ रुपये बैंक में जमा होने की पुख्ता चर्चा है। हालांकि शुरुआती दिनों में यह गिनती हफ्ते में एक बार होती थी, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद जब भीड़ बढ़ी तो दानपात्र बढ़ाए गए और बैंक के 14 कर्मचारियों के साथ-साथ TCS जैसी बाहरी एजेंसी के कर्मचारियों को भी इस काम में तैनात किया गया। आज तीसरे दिन की जांच में SIT ने इसी कैश काउंटिंग टीम और TCS के कर्मचारियों को आमने-सामने बिठाकर सच उगलवाने की कोशिश की।

जाहिर है राम के नाम पर पत्थर भी तैर गए थे, लेकिन आज राम के नाम पर आए दान पर ही कुछ इंसानों की नीयत डोल गई है! करोड़ों हिंदुओं की आस्था के सबसे बड़े केंद्र में हुआ यह दान गबन का मामला सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं, बल्कि देश की आत्मा पर चोट है। एक तरफ जहां संदिग्ध खुद को पाक-साफ बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ SIT की पेनड्राइव में कैद सीसीटीवी फुटेज और बैंक के दस्तावेज किसी बड़े तूफान का इशारा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या SIT इस पवित्र परिसर को कलंकित करने वाले चेहरों को बेनकाब कर पाएगी, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा? अयोध्या से लेकर दिल्ली तक, हर कोई बस इसी इंतजार में है कि कब कानून का चाबुक चलेगा और कब रामलला के खजाने की पाई-पाई का हिसाब देश के सामने आएगा! 

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