राम मंदिर चढ़ावा प्रबंधन पर SIT रिपोर्ट: प्रशासन को सौंपी जांच, कई अनियमितताओं के संकेत
राम मंदिर से जुड़ी चढ़ावा राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर एसआईटी द्वारा की गई प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट मंगलवार सुबह गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी गई। जांच एजेंसी के अनुसार, रिपोर्ट में दान राशि की गिनती और प्रबंधन प्रक्रिया में गड़बड़ियों, कमीशनखोरी और संभावित वित्तीय हेरफेर के संकेत मिले हैं। साथ ही, कर्मचारियों की भर्ती और दान गणना प्रणाली में गंभीर खामियों की आशंका भी जताई गई है।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और कुछ गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट को गोपनीय रूप से शासन को सौंपा गया है, जिसके बाद इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कुछ पदाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है, जबकि कुछ को निगरानी में लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है।
इसके अलावा, जांच में इन अधिकारियों के करीबियों और रिश्तेदारों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें ‘टिन्नू यादव’ सहित अन्य नाम शामिल हैं। अनुमान है कि करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका इस कथित गड़बड़ी में सामने आई है, जिनके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अनिल मिश्रा पर कथित तौर पर कमीशन लेने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है। हालांकि, एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच है और विस्तृत जांच अभी जारी है, जो आने वाले दिनों में और तथ्य उजागर कर सकती है।
जांच में यह भी सामने आया है कि महाकुंभ और माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते चढ़ावे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिसका कथित रूप से कुछ लोगों ने दुरुपयोग किया। इस दौरान प्रतिदिन लाखों रुपये तक की हेराफेरी किए जाने की आशंका जताई गई है।
पूरे मामले को एक सुनियोजित प्रणालीगत गड़बड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और दान गणना प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाए जाने की बात कही गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला कई स्तरों पर फैले नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है और आगामी विस्तृत रिपोर्ट में और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
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