लापरवाह छावनी परिषद तापमान में बढ़ोतरी के साथ शहर में मच्छरों का आतंक--परमजीत सिंह सैनी

रामगढ़ : छावनी परिषद रामगढ़ के द्वारा सफाई और फॉगिंग की व्यवस्था नहीं की जा रही है। मच्छरों की बढ़ती संख्या और गंदगी के कारण बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ शहर में मच्छरों का आतंक बढ़ गया है। इससे बच्चे व बुजुर्गों में डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, शहर में कई जगहों पर खुले नाले, कचरे का अंबार मच्छरों के प्रजनन के लिए मुफीद बना हुआ है। स्थिति यह है कि लोगों को दिन में भी मच्छर काट रहे हैं। सबसे बुरा हाल शहर के रेलवे स्टेशन बिजुलिया और बिजुलिया तालाब के निकट  बसे मोहल्लों का है। इन इलाकों में जलजमाव और गंदगी के कारण बीमारियां पनप रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि छावनी परिषद रामगढ़ की ओर से सफाई व फॉगिंग की व्यवस्था नहीं कराई जा रही है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए समाज सेवी परमजीत सिंह सैनी ने छावनी परिषद रामगढ़  से मांग की है कि अविलंब सफाई अभियान चलाया जाए और फॉगिंग कराई जाए और समाजसेवी परमजीत सिंह ने कहा की छावनी परिषद की लापरवाही से शहर में बढ़ती गंदगी के कारण इन दिनों शहर के लोग मच्छरों के प्रकोप से परेशान हो रहे हैं। मौसम में आए बदलाव के कारण मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी होती है, पर कई मोहल्लों में खुले नालों व जगह-जगह कचरे का जमाव और समय पर फॉगिंग नहीं होने के कारण मच्छरों की संख्या असामान्य तरीके से बढ़ गई है। शहर में मच्छरों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा कारण खुले नाले और कचरे का अनियमित उठाव है। कई मोहल्लों में स्थिति खराब है। कहीं नाले की सफाई हुए लंबा वक्त बीत चुका है। इन अधूरे और बंद पड़े नालों में जमा गंदा पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे मुफीद जगह साबित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सड़कों के किनारे लगे कचरे के ढेर और नल का समय पर सफाई  नहीं होना इस समस्या को और भी विकराल बना दिया है। शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि एक ओर बिजुलिया तालाब के किनारे बसी बस्तियां हैं और दूसरी ओर बिजलिया मोहल्ला में ठीक से सफाई नहीं हुआ नाले मच्छरों का अस्थाई स्थान बन गया है। इन दोनों छावनी परिषद में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए जीना मुहाल हो गया है। तालाब के किनारे जमा कचरा और नाले की गंदगी ने मच्छरों की फौज खड़ी कर दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम होते ही मच्छरों का आतंक इतना बढ़ जाता है। हैरानी की बात यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार छावनी परिषद रामगढ़ का तंत्र पूरी तरह सुस्त है। लोगों ने बताया कि पहले मौसम बदलते ही नियमित रूप से फॉगिंग (धुआं छिड़काव) और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता था, जिससे मच्छरों की संख्या कम रहती थी। लेकिन इस बार कई वार्डों में फॉगिंग मशीन की गूंज तक सुनाई नहीं दी है। मजबूरन लोग अपनी जेब ढीली कर मच्छरदानी, कॉइल, इलेक्ट्रिक बैट और स्प्रे का सहारा ले रहे हैं, मगर ये तमाम उपाय भी बेअसर साबित हो रहे हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की नींद हराम हो गई है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि छावनी परिषद ने शीघ्र ही सफाई और फॉगिंग की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की, तो शहर में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियों का विस्फोट हो सकता है। दूषित वातावरण और मच्छरों का बढ़ता डंक किसी बड़ी महामारी को निमंत्रण दे रहा है। लोगों ने बताया कि बरसात के बाद और मौसम में बदलाव के इसके अलावा कई स्थानों पर गंदगी और छोटे जलजमाव वाले स्थानों में गंदा पानी जमा होने से भी मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लोगों ने बताया कि पिछले वर्षों में इस मौसम में छावनी परिषद की ओर से नियमित फॉगिंग कराई जाती थी लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते फॉगिंग और दवा का छिड़काव नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। मडॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में मच्छरों के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में छावनी परिषद रामगढ़ और स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। लेकिन शहर के इलाकों में गंदगी और नल की ठीक से सफाई नहीं होने के कारण और जलजमाव की स्थिति यह संकेत दे रही है कि इन खतरों को छावनी परिषद रामगढ़ गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

रिपोर्टर : राजीव सिंह

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