राज्यपाल की मौजूदगी में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ

रामगढ़ - रांची रोड स्थित जिमखाना क्लब में स्वर्गीय रामचंद्र रूंगटा की पुण्य स्मृति में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। आयोजन की शुरुआत सुबह भव्य मंगल कलश शोभायात्रा के साथ हुई। वहीं,आयोजित कथा के प्रथम दिन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार शामिल हुए और श्रद्धालुओं के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। राज्यपाल के रामगढ़ पहुंचने पर उपायुक्त ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत ने उनका स्वागत किया। राज्यपाल की मौजूदगी ने धार्मिक आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

कलश शोभायात्रा से पूर्व प्रणीत टावर स्थित मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर और श्रद्धालुओं ने हाथों में श्रीमद्भागवत ग्रंथ लेकर शोभायात्रा में हिस्सा लिया। भक्ति और आस्था से सराबोर शोभायात्रा के दौरान पूरा वातावरण राधे-राधे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि वे लंबे समय तक लोकसभा के सदस्य रहे हैं और आठ बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि बरेली में अपने सार्वजनिक जीवन के दौरान विभिन्न महापुरुषों के प्रवचन कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला और कई संत-महापुरुषों को व्यक्तिगत रूप से जानने का भी अवसर मिला। राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन समाज के लिए उपयोगी हैं। लोगों को महापुरुषों के विचारों और उनके प्रवचनों को सुनना चाहिए तथा उनके बताए मार्ग और अच्छे आचरण को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन की सराहना करते हुए आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं। उनकी शुभकामनाएं झारखंड और झारखंड की जनता के साथ हैं।

आयोजन में रूंगटा परिवार की ओर से माया रूंगटा, अभिषेक रूंगटा, आलोक रूंगटा, आशीष रूंगटा, नेहा, शुभ्रा समेत बड़ी संख्या में सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। आयोजन की व्यवस्था में मारवाड़ी युवा मंच और चेतना समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आयोजन समिति की ओर से माया रूंगटा ने रांची, रामगढ़ सहित पूरे झारखंड के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होने की अपील की। समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने के लिए किसी पास की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धालु समय से पहुंचकर आगे बैठ सकते हैं और सपरिवार एवं इष्ट-मित्रों के साथ कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ ले सकते हैं।

संवाददाता - राजीव सिंह

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