केन्द्रीय बजट आया है, लेकिन आम आदमी को राहत नहीं—सिर्फ़ भाषण मिला है
रांची : केन्द्रीय बजट आया है, लेकिन आम आदमी को राहत नहीं—सिर्फ़ भाषण मिला है। सरकार जश्न मना रही है, पर जनता आज भी रोज़मर्रा के खर्च से जूझ रही है। अगर यह बजट सच में आम लोगों के लिए होता, तो बिजली के बढ़ते बिल, पेट्रोल-डीज़ल और रसोई गैस की कीमतें, महंगा परिवहन और राशन की बढ़ती लागत पर सीधी राहत दिखती। सच्चाई यही है कि घर का बजट न नारों से चलता है, न आंकड़ों से वह महीने के खर्च से चलता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार को सबसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए था। आज पढ़ाई लगातार महंगी हो रही है और इलाज बीमारी से बड़ा डर बन चुका है, लेकिन बजट इन बुनियादी मुद्दों पर खामोश है।
युवाओं के लिए घोषणाएँ बहुत हैं, पर स्थायी रोज़गार की ठोस योजना नज़र नहीं आती। किसानों के लिए वादे दोहराए गए हैं, मगर लागत और MSP की सुरक्षा फिर टाल दी गई यही वजह है कि यह बजट ज़मीन की हकीकत से कटा हुआ लगता है।
कांग्रेस पार्टी का साफ़ मानना है कि विकास का मतलब सिर्फ़ आंकड़े नहीं होते। विकास का मतलब है, कम बिजली बिल, सस्ता ईंधन, सुरक्षित राशन, सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भरोसेमंद स्वास्थ्य व्यवस्था और सम्मानजनक रोज़गार।
मेरी साफ़ राय है— जो बजट आम आदमी की रसोई नहीं देखता, युवा के भविष्य को गंभीरता से नहीं लेता और गरीब-मध्यम वर्ग की परेशानी नहीं समझता, वह जनता का बजट नहीं हो सकता। देश को जुमलों की नहीं, राहत देने वाली नीतियों की ज़रूरत है—और यही सोच कांग्रेस की पहचान है।
रिपोर्टर : नदीम दानिश

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