18 मार्च को विधानसभा घेरेंगे पत्रकार, सुरक्षा कानून-पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की मांग पर जेजेए (JJA) का बड़ा ऐलान
खलारी : झारखंड में पत्रकारों की लंबित मांगों को लेकर झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन ने 18 मार्च को झारखंड विधानसभा के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इसको लेकर संगठन के पदाधिकारियों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों को मांगपत्र सौंपकर आंदोलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
शुक्रवार को विधानसभा परिसर में जेजेए(JJA) के संस्थापक शाहनवाज हसन, आकाश कुमार सोनी, पंकज कुमार और ओमवीर सिंह ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायकों से मुलाकात कर पत्रकारों की समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान विधायक राज सिन्हा, नवीन जायसवाल, सरयू राय, अरूप चटर्जी, डॉ. नीरा यादव, रागिनी सिंह और पुर्णिमा दास को भी ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र में मीडिया चौथा स्तंभ है और उसका काम जनता की आवाज को निष्पक्ष रूप से सरकार तक पहुंचाना है। लेकिन विडंबना यह है कि देश के कई राज्यों में पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं, जबकि झारखंड में अब तक न तो स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई है और न ही पेंशन व्यवस्था सही तरीके से लागू हो पाई है।
संगठन ने आरोप लगाया कि कोविड-19 के दौरान जान गंवाने वाले पत्रकारों के परिवारों को झारखंड सरकार की ओर से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी गई, जबकि उत्तर प्रदेश में मृत पत्रकारों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये की सहायता दी गई थी।
जेजेए(JJA) ने यह भी कहा कि राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर हालात चिंताजनक हैं। कई पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और कई को भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने पर झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। संगठन के अनुसार, लंबे संघर्ष के बाद ही दिवंगत पत्रकार चंदन तिवारी की पत्नी को सरकारी नौकरी मिल सकी।
संगठन ने सभी राजनीतिक दलों, सांसदों, विधायकों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा के लिए 18 मार्च को सुबह 10 बजे से झारखंड विधानसभा के सामने होने वाले धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दें।जेजेए(JJA) का कहना है कि निष्पक्ष और सशक्त मीडिया के बिना लोकतंत्र की रक्षा संभव नहीं है।
रिपोर्टर : राशीद अंसारी
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